भारत-अमेरिका की नजदीकी से चिढ़ा चीनी, कहा- जंग कराना चाहता है US

बीजिंग (26 जुलाई): डोकलाम में पिछले एक महीने से ज्यादा से भारत और चीन की सेना आमने-सामने है। और फिलहाल ये विवाद सुलझता भी नजर नहीं आ रहा है। डोकलाम को लेकर दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़ा है। चीन लगातार भारत पर पीछे हटने के दवाब के तहत तरह-तरह का हथकंडा अपना रहा है। चीनी विदेश मंत्री ने इस पूरे विवाद के लिए भारत को जिम्मेदार बताया है और साफ कहा है कि चीन ने भारत की जमीं पर घुसपैठ नहीं की है बल्कि भारत ऐसा कर रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि भारत अपनी सेना वापस ले जाए।

इन सबके बीच चीन को डर है कि भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने पर अमेरिका उसका मदद कर सकता है। इसी डर के तहत चीन ने अब अमेरिका पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया है। चीन की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में सू तान ने लिखा है कि भारत और चीन के द्विपक्षीय मामले में कुछ अन्य देश दखल देने की कोशिश कर रहे हैं। तान ने अमेरिकी अखबार वाशिंगटन इक्जामिनर के एक लेख के हवाले से कहा कि वे चीन का भय दिखा रहे हैं और अमेरिका-भारत की दोस्ती की तारीफ कर रहे हैं। तान ने कहा कि इस लेख में चीन की बढ़ती ताकत के खिलाफ अमेरिका को भारत का पक्ष लेने और दुनिया को चीन के खिलाफ एकजुट करने की सलाह दी गई है।

आपको बात दें दो दिन पहले अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन एग्जामिनर में 'ट्रंप मस्ट सपोर्ट इंडिया अगेन्स्ट चाइना' नाम से एक लेख छपा था। जिसमें कहा गया था कि अमेरिका चीन के खिलाफ भारत को जरूर समर्थन और मदद करेगा। साथ ही अखबार ने कहा था कि भारत और अमेरिका एक महत्वपूर्ण संबंध साझा करते हैं। चीनी के बढ़ते कदम से निपटने के लिए अमेरिका भारत की मदद जरूर करेगा। इस लेख के बाद चीन भारत के बहाने अमेरिका पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया है। 

चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि डोकलाम विवादित इलाका नहीं है। यह पर सीमाएं काफी पहले से ही निर्धारित हैं। चीन ने कहा कि जहां भी विवाद होता है अमेरिका पहुंच जाता है और ऐसा शायद ही होता है कि वह निष्पक्ष भूमिका लेकर विवाद का निपटारा करे। लेख में कहा गया है कि पश्चिम की कुछ ताकतें भारत और चीन में युद्ध कराना चाहती हैं। इससे उनको रणनीतिक लाभ होगा और वह भी बिना कुछ लगाए। वाशिंगटन ने दक्षिण चीन सागर में इसी रणनीति का सहारा लिया है।