चीन ने सौंपा पाकिस्तान को यह "खतरनाक हथियार", जानिए भारत को क्या है खतरा?

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (1 अगस्त): बार-बार परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की दुहाई देने वाला चीन आज खुद उसका मजाक बना रहा है। चीन ने पाकिस्तान को न्यूक्लियर रिएक्टर दिए है। वही न्यूक्लियर रिएक्टर जिसका पाकिस्तान बिजली बनाने की जगह परमाणु बम बनाने में इस्तेमाल करता रहा है। चीन ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की मेंबरशिप का यह कहकर विरोध किया था कि भारत ने नॉन-प्रॉलिफरेशन ट्रीटी (NPT) पर साइन नहीं किए। अब उन्हीं नियमों को ताक पर रखकर चीन ने पाकिस्तान को न्यूक्लियर रिएक्टर दिए हैं। जानिए कैसे कर रहा है चीन, पाकिस्तान के परमाणु प्रोग्राम में मदद...

आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (ACA) की रिपोर्ट ने किया खुलासा- हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में NPT रिव्यू कॉन्फ्रेंस के दौरान रखे प्रपोजल को दरकिनार करते हुए चीन ने पाकिस्तान से 2013 में न्यूक्लियर रिएक्टर देने की डील की थी। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (ACA) ने अपनी रिपोर्ट में चीन के इस कदम को NPT के नियमों के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 'चीन एक ऐसे देश (पाकिस्तान) को ये रिएक्टर्स दे रहा है जो इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के मानकों पर खरा नहीं उतरता।'

Chashma 3 प्लांट के लिए दिए न्यूक्लियर रिएक्टर- ACA की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान के साथ Chashma 3 न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए 2013 में करार किया था। चीन ने पाकिस्तान को Chashma 3 न्यूक्लियर पावर कॉम्प्लेक्स के लिए अभी तक 6 परमाणु रिएक्टर उपलब्ध कराए हैं। 2004 से लेकर अभी तक चीन की NSG की सदस्यता इस मामले में आड़े नहीं आई है। चीन ने पाकिस्तान को परमाणु रिएक्टरों की सप्लाई के लिए 2003 की डील को आधार बनाया है, हालांकि तब चीन NSG का सदस्य नहीं था।

कहां है Chashma न्यूक्लियर प्लांट- साल 2000 में  चीन की सहायता से पाकिस्तान ने चश्मा में न्यूक्लियर प्लांट की स्थापना की थी। चश्मा न्यूक्लियर प्लांट पाक पंजाब के जिले मियांवाली में स्थित है जो राजधानी इस्लामाबाद से 280 किमी दूर है और दिल्ली से 680 किमी दूर। सितम्बर 2000 से यह प्लांट पूरी तरह से काम कर रहा है। इसके बाद 2011 में चीन ने चश्मा न्यूक्लियर पावर प्लांट नंबर 2 का निर्माण करवाया। जून 2016 में इसके तीसरे परमाणु सयंत्र पर काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा चौथे प्लांट पर भी काम चल रहा है जिसके मार्च 2017 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

परमाणु अप्रसार संधि​ (NPT) क्या है- NPT न्यूक्लियर हथियारों का विस्तार रोकने और न्यूक्लियर तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है। NPT की घोषणा 1970 में हुई थी। अब तक 187 देशों ने इस पर साइन किए हैं। इस पर साइन करने वाले देश भविष्य में न्यूक्लियर बम विकसित नहीं कर सकते। हालांकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पर्यवेक्षक करेंगे। इस पर साइन नहीं करने वालों में भारत, पाकिस्तान और इस्राइल जैसे देश शामिल हैं। उत्तर कोरिया इससे पहले ही अलग हो चुका है।

चीन की मदद से पाकिस्तान ने बनाए न्यूक्लियर बम- चीन पाकिस्तान का व्यापारिक ही नहीं रणनीतिक साझेदार भी है। चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य गठजोड़ भारत के लिए एक प्रमुख रणनीतिक चुनौती बन चुकी है। चीन को पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियार कार्यक्रम में प्रत्यक्ष तौर पर सहायता के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान को परमाणु हथियारों के विकास के लिए सामान, न्यूक्लियर वार-हेड डिजाइन और कम से कम दो न्यूक्लियर बमों के लिए पर्याप्त HEU (अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम) और दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक मुहैया कराने में भी चीन का ही हाथ है।

वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम तैयार कर रहा है पाकिस्तान- इससे पाकिस्तान को चश्मा और खुशाब परमाणु केन्द्र में वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम के उत्पादन खातिर न्यूक्लियर रिएक्टरों के निर्माण में मदद मिली। इसकी वजह से पाकिस्तान न्यूक्लियर बम के लिए प्लूटोनियम बनाने में सक्षम हो गया। साथ ही चीन ने M-9 और M-11 न्यूक्लियर सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल भी पाकिस्तान को दिए हैं।

चीन देता है पाकिस्तान को 50% सब्सिडी पर हथियार- चीन पाकिस्तान को  50 प्रतिशत सब्सिडी पर हथियार निर्यात भी करता रहा हैं। चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से लड़ाकू विमान JF-17 और FC-1 बनाए हैं। पाकिस्तान का मुख्य युद्धक टैंक अल-खालिद चीन की मदद से ही तैयार किया गया है। इसके अलावा टैंकरोधी मिसाइल जैसे हथियार भी चीन की मदद से ही पाकिस्तान ने विकसित किए हैं।

पाकिस्तान पर इतना मेहरबान क्यों है चीन?

- चीन की PoK के रास्ते पाकिस्तान तक रेल लाइन बनाने की योजना- चीन ने अंतरराष्ट्रीय रेल लाइन से अपने सीमावर्ती प्रांत शिनजिआंग को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर कथित तौर पर शुरुआती शोध अध्ययन पर काम शुरू किया है। परियोजना को लेकर भारत को एतराज है क्योंकि यह रेललाइन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगी। 1,800 किलोमीटर चीन-पाकिस्तान रेलवे लाइन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तथा कराची के रास्ते  गुजरेगी। चीन ने अपने पश्चिमी शहर शिनजिआंग के काशगर से पाकिस्तान के ग्वादार बंदरगाह को जोड़ने वाली रेल लाइन के निर्माण के लिये शुरुआती अध्ययन कराने को लेकर कोष आवंटित कर चुका है।

- चीन ने पाकिस्तान को दी 56 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद- पाकिस्तान में अपने रेल नेटवर्क और आर्थिक कॉरिडोर को और अधिक मजबूत करने के लिए चीन पाकिस्तान में निवेश कर रहा है। पाकिस्तान के रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत करने तथा पाकिस्तान व ईरान के बीच एक पाईपलाईन का निर्माण करने के लिए चीन, पाकिस्तान में 8.5 बिलियन डॉलर (56 हजार करोड़ रुपये) का निवेश किया है। पाकिस्तान में बड़ी परियोजनाओं को अधिकृत करने वाली सेंट्रल डेवलेपमेंट वर्किंग पार्टी (सीडीडब्ल्यूपी) ने 10 बिलियन डॉलर की लागत से बनने वाली दो परियोजनाओं को इसी साल जून में मंजूरी दी थी।  

- चीन कराची में ग्वादर पोर्ट पर जमा चुका है कब्जा- हिंद महासागर में अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के तहत चीनी इंजीनियर मकरान तट पर ग्वादर में पाकिस्तान के दूसरे प्रमुख बंदरगाह के निर्माण में लगे हुए हैं। इस बंदरगाह को आसानी से चीनी नौसेना के जहाजों के लिए एक नौसेना बेस के तौर पर खड़ा किया जा सकता है. साफ तौर पर चीन हर तरफ से भारत की सामरिक घेरेबंदी में लगा हुआ है. चीन, पाकिस्तान कॉरीडोर परियोजना के समझौते पर उस समय हस्ताक्षर हुए थे जब चीन के राष्ट्रपति ने अप्रैल 2015 में पाकिस्तान का दौरा किया था।

- चीन की चीन-पाक आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) को बनाने की योजना- इस योजना पर आगे बढ़कर चीन ने साफ जाहिर कर दिया है कि उसकी मंशा पाक अधिकृत कश्मीर में स्थायी ठिकाना बनाने की है। उसका यह रवैया कश्मीर पर पिछले दो दशक के रवैए से अलग है। हालांकि चीन के अधिकारी जोर देकर कहते हैं कि उसके इस रवैए में कोई बदलाव नहीं आया है कि कश्मीर मसले का हल 'भारत और पाकिस्तान को निकालना' है।

- PoK से गुजरेगा ''सिल्क रोड''- ऐतिहासिक सिल्क रोड मुख्य रूप से चीन को मध्य एशिया होते हुए यूरोप से जोड़ता है। अब चीन की ताजा परियोजनाएं है पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारा। यह गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। इसके तहत सड़कें, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे। इसे कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान तक जोड़ा जाएगा।

- PoK में बड़ी तादाद में मौजूद हैं चीनी सैनिक- सेना की उत्तरी कमान के अनुसार पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में बड़ी तादाद में चीनी सैनिक और चीनी वर्कर मौजूद हैं। और वे लोग गिलगिट-बालतिस्तान और पीओके के बीच चल रहे निर्माण कार्यों में शामिल हैं।

 

आतंकियों के कब्जे में जा सकते हैं पाकिस्तान के परमाणु बम?

- मार्च 2016- अमेरिकी थिंक टैंक हार्वर्ड केनेडी स्कूल की रिपोर्ट... अमेरिका के गैर सरकारी संगठन ने चेताया है कि पाकिस्तान ने गैर सामरिक परमाणु हथियारों की तरफ रूख किया है। इसी के साथ उसके परमाणु हथियार की चोरी का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी थिंक टैंक हार्वर्ड केनेडी स्कूल की ओर से जारी रिपोर्ट प्रीवेंटिंग न्यूक्लीयर टेररिज्म कंटिन्युअस इम्प्रूवमेंट ऑर डेंजरस डिक्लाइन में यह कहा गया है कि पाकिस्तान में परमाणु चोरी का खतरा बहुत बढ़ गया है। इसके अनुसार पाकिस्तान के परमाणु जखीरे का विस्तार हो रहा है।

- जनवरी 2016- कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 'भारत को डराने के लिए पाक ने तैनात कर रखे हैं 130 परमाणु हथियार'... भारत को सैन्य कार्रवाई करने से भयभीत करने के मकसद से पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार उसकी तरफ निशाना करके लगा रखे हैं।  अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 110 से लेकर 130 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं। यह जानकारी अमेरिकी कांग्रेसनल की नई रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में इस बारे में चिंता जाहिर की गई है कि इस्लामाबाद के शक्ति संतुलन सिद्धांत के कारण दक्षिण एशिया में दो पड़ोसी देशों के बीच परमाणु संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।

- अप्रैल 2015 में न्यूयार्क टाइम्स के लेख में लिखा गया... दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए पाकिस्तान सबसे बड़ा सिरदर्द... अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने दावा किया है कि पाकिस्तान की सेना पूरी तरह से परमाणु बम पर निर्भर है। वह अपनी रक्षा के लिए भारत पर परमाणु हमला करने से नहीं चूकेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स ने 'न्यूक्लियर फियर्स इन साउथ एशिया' संपादकीय में लिखा, "पाकिस्तान जानता है कि भारत के साथ युद्ध में उसका क्षेत्रफल और सेना का कोई मुकाबला नहीं है इसलिए पाक सेना पूरी तरह परमाणु बम पर निर्भर है।

- अगस्त 2015- अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और स्टिम्सन सेंटर की रिपोर्ट... 10 साल में न्यूक्लियर पावर वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा पाकिस्तान अगले पांच से दस साल में पाकिस्तान के पास 350 परमाणु हथियार हो जाएंगे और वह परमाणु हथियारों वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। यह खुलासा दो अमेरिकी थिंक टैंकों की रिपोर्ट में किया गया है। उसके पास भारत से दोगुने परमाणु बम हो जाएंगे। फिलहाल अमेरिका और रूस के पास सबसे ज्यादा हैं। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और स्टिम्सन सेंटर ने रिपोर्ट तैयार की है। इसके अनुसार भारत का डर दिखाकर पाकिस्तान तेजी के साथ परमाणु क्षमता का विकास कर रहा है। वह एक साल में 20 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है।

- परमाणु बम के कारण पाक को बड़ी समस्या मानते हैं डोनाल्ड ट्रंप- अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान बहुत बड़ी समस्या है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उसे हालात पर काबू पाने की जरूरत है। विंसकान्सिन में सीएनएन से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "पाकिस्तान बहुत बड़ी समस्या है। हमारे लिए वह वास्तव में बेहद अहम देश है क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं। उसे अपने हालात पर नियंत्रण पाना होगा।"

- पाकिस्‍तान बढ़ा रहा है अपना परमाणु जखीरा- अमेरिकी विदेश विभाग... अमेरिका में विदेश विभाग के शस्त्र नियंत्रण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामले पर अवर सचिव राइज ई गोट्टेमोएलर भी दे चुके हैं चेतावनी कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से सुरक्षा का खतरा पैदा हुआ है।

- पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा न्यूक्लियर बम- बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट ने मार्च 2012 में जारी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किन देशों के पास कितने न्यूक्लियर बम हैं...

देश                   न्यूक्लियर बम भारत               90-100 पाकिस्तान       100-110 चीन                250

- भारत, पाकिस्तान और चीन की सैन्य ताकत...

                             भारत               पाकिस्तान          चीन एक्टिव फौजी          13.25 लाख       6.17 लाख          22.85 लाख विमान                   2086                914                  2942 लड़ाकू विमान         809                  387                  1385 हेलिकॉप्टर             646                313                    802 सभी तरह के टैंक     6464              2924                  9150 युद्धपोत                 295                  74                    714 विमानवाहक पोत    2                      0                     1 पनडुब्बी               15                     8                      68