पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, कभी भी हो जाएगा दिवालिया, चीन की बड़ी चिंता

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (22 फरवरी): सूखी रोटी खाकर भारत को करारा जवाब देने के सपने देखने वाला पाकिस्तान आज वाकई सूखी रोटी खाने को मजबूर हो गया है। पाकिस्तान कंगाल हो गया है। जी हां, सही सुना पाकिस्तान कंगाल हो गया है, दुनिया के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हो चुका है पाकिस्तान और यह हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान के सबसे बड़े दोस्त चीन का मीडिया कह रहा है। चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' में मंगलवार को खबर छपी जिसमें चीन की सरकार से अपील की गई कि पाकिस्तान का बढ़ता राजकोषीय घाटा किसी बड़े वित्तीय संकट में नहीं बदले ये चीन सरकार को सुनिश्चित करना होगा। अब सवाल उठेगा की पाकिस्तान कंगाल होता है तो चीन को क्या नुकसान? इसका जवाब है कि चीन ने पाकिस्तान में भारी निवेश कर रखा है। चीन पाकिस्तान में इकोनॉमिक कॉरिडोर बना रहा है जिसमें उसने 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है। यही नहीं चीन की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने पाकिस्तान की घाटे की कंपनियों का अधिग्रहण किया है। ऐसे में अगर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गिरती है तो चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

चीन के सहारे चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था- पाकिस्तान में चीन के बढ़ते इंवेस्टमेंट पर IMF यानी इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड ने पिछले साल अक्टूबर में नवाज सरकार को आगाह किया था कि चीन के बढ़ते निवेश से डूब सकता है पाकिस्तान। लेकिन पाक सरकार ने IMF की चेतावनी को दरकिनार करते हुए चीनी निवेश जारी रखा। आज पाकिस्तान की हालत ये हो गई है कि बिना चीनी कर्जे के वो एक कदम आगे नहीं बड़ सकता। हाल ही में चीन ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए करीब 60 करोड़ डॉलर यानी 4 हजार करोड़ का कर्ज दिया था। पिछले साल दिए 70 करोड़ डॉलर यानी 4600 करोड़ रुपए कर्ज को मिलाकर कुल कर्ज 1.3 अरब डॉलर यानी 9 हजार करोड़ पहुंच गया हैं। सउदी अरब से भी पाकिस्तान 1.5 अरब डॉलर यानी 10 हजार करोड़ की सहायता ले चुका है।

चीन को किस बात का डर है...

    * चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने किया है पाक इकॉनोमी पर बड़ा खुलासा।

    * अखबार ने चीन की सरकार से अपील की है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बचाएं।

    * पाकिस्तान का बढ़ता राजकोषीय घाटा किसी बड़े वित्तीय संकट में नहीं बदले जाए।

    * पाकिस्तान के बढ़ते राजकोषीय घाटे व सार्वजनिक ऋण को लेकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में चिंता है।

    * अखबार के अनुसार इससे ऋण चुकाने की पाकिस्तान की क्षमता पर सवालिया निशान लगे हैं।

    * गौरतलब है कि चीन पाकिस्तान में सबसे बड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर बना रहा है।

    * इसके लिए चीन ने 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है।

    * चीन CPEC परियोजना के माध्यम से शिंजियांग प्रांत को ग्वादर पोर्ट से जोड़ना चाहता है।

    * ग्वादर बलूचिस्तान में है और यहां चीनी दखल से बलोच पहले से ही नाराज हैं।

    * बलोच जनता पाकिस्तान के अंदर और बाहर CPEC परियोजना का विरोध कर रही है।

    * CPEC में गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है।

    * गिलगिट-बल्टिस्तान और पीओके की जनता भी चीन का विरोध कर रही है।

    * पाकिस्तान सैन्य ताकत से विरोध को दबा रहा है, लेकिन कब तक इस पर चीन की चिंता है।

    * साथ ही पाकिस्तान में बढ़ता आतंकवाद भी चीन की चिंता का कारण बन गया है।

चीनी कंपनियों ने पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर किया है निवेश...

    * वन रोड, वन बेल्ट प्रॉजेक्ट में चीन पाकिस्तान को बेहद अहम हिस्सा मानता है।

    * मौजूदा दौर मे चीन की घरेलू इकॉनमी कमजोर पड़ती जा रही है।

    * जिसके चलते उसने विदेशी निवेश बढ़ाने की कोशिशें तेज की हैं।

    * चीन वन रोड, वन बेल्ट प्रॉजेक्ट के तहत ग्लोबल नेटवर्क तैयार करना चाहता है।

    * अब वो अपना सामान चीन की जगह उसी देश में बनाना चाहता है जहां उसे व्यापार करना है।

    * इसी कड़ी में चीनी कंपनियां पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद रही हैं।

    * कायदे से जब किसी देश में निवेश किया जाता है तो वहां की कंपनियों से समझौता किया जाता है।

    * लेकिन चीन वहां की कंपनियों से जुड़ने की जगह अपनी नई-नई इंडस्ट्री लगा रहा है।

    * साथ ही पाकिस्तान की बड़ी-बड़ी कंपनियों का सीधा अधिग्रहण कर रहा है।

    * हाल ही में एक चीनी ने पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज में बड़ा हिस्सा लिया है।

    * इसके अलावा शंघाई इलेक्ट्रिक पावर ने पाकिस्तान की सबसे बड़ी एनर्जी फर्म K-इलेक्ट्रिक का अधिग्रहण किया है।

    * चीन की दिग्गज स्टील कंपनी बाओस्टील ग्रुप की पाकिस्तान की सरकारी स्टील कंपनी के अधिग्रहण पर बात चल रही है

पाकिस्तान का कैसे बड़ा राजकोषीय घाटा...

    * पाकिस्तान का कुल कर्ज 18 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के पार हो गया है

    * पीएम नवाज शरीफ के कार्यकाल में इसमें 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

    * देश की 19.28 करोड़ आबादी के हिसाब से हर नागरिक पर 94,727 रुपये का कर्ज है।

    * 30 सितंबर 2016 तक देश का कर्ज 18 लाख करोड़ 27 अरब के पार पहुंच गया है।

    * 2012-13 में यह ऋण 13 लाख करोड़ 48 अरब रुपये था।

    * आतंकवाद, खराब कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई पाकिस्तान में चरम पर है।

    * पाकिस्तान सरकार की माली हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

    * पाकिस्तान में एक लीटर दूध की कीमत भारत से दुगनी है 80 से 90 रूपए प्रति लीटर।

    * ग्रीस की तरह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी उधार पर आधारित हो गई है।

    * घर खरीदना हो तो उधार लो, पढ़ाई करनी हो तो उधार लो, कर्ज की किश्त चुकानी हो तो उधार लो।

    * इसकी दो बड़ी वजह है एक इकोनॉमी को मजबूत करने से ज्यादा हथियारों पर खर्च करना।

    * दूसरा दुनियाभर से लिया गया 163 बिलियन डॉलर यानी 17 ट्रिलियन रुपये का कर्ज।

    * पाकिस्तान की 98 फीसदी आबादी टैक्स नहीं देती, यहां तक की 2/3 से ज्यादा सांसद भी टैक्स नहीं देते।

    * कुल टैक्स रेवेन्यू का 68 फीसदी अप्रत्यक्ष टैक्स से आता है, जिसके कारण और गरीबी बढ़ रही है।