'एनएसजी के मुद्दे पर बड़ा मोल-भाव करना चाहता है चीन'

नई दिल्ली (14 जून): न्यूक्लिर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री को लेकर चीन के रुख में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है।  बीते रोज चीन न कहा कि 24 जून को सोल में होने वाले एनएसजी पूर्ण अधिवेशन से पहले नए सदस्य देशों को शामिल करने के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श करेगा। ऐसा समझा जा रहा है कि चीन भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण एशिया में अमेरिकी हस्तक्षेप तथा भारत की भूमिका सीमित करने के लिए मोलभाव करना चाहता है। साथ ही वो पाकिस्तान को भारत के बराबर खड़ा कर अमेरिकी बर्चस्व को भी चुनौती देना चाहता है।

 इसी मुद्दे पर पूछे गये सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, एनएसजी इस पर विस्तृत चर्चा करेगा कि उसमें परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देश कैसे शामिल हो सकते हैं। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत इस समूह में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है। समूह में फिलहाल 48 देश हैं। चीन ने रविवार को कहा था कि 9 जून को एनएसजी चेयर अर्जेंटीना के राजदूत रफेल मरियानो ग्रॉसी द्वारा वियना में बुलाई गई बैठक में नए सदस्यों को शामिल करने के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई।

अमेरिका समेत एनएसजी के अधिकतर सदस्य देश भारत की इस समूह की सदस्यता का समर्थन करते हैं। वहीं ऐसी खबरें हैं कि न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया के साथ चीन इस संगठन में भारत के प्रवेश के खिलाफ है। चीन एनएसजी में पाकिस्तान के प्रवेश का समर्थन कर रहा है। उसका कहना है कि एनएसजी में एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले सदस्यों को शामिल करने को लेकर आम-सहमति होनी चाहिए।