चीन और ISIS से निपटने के लिए भारत और अमेरिका ने मिलाया हाथ

नई दिल्ली ( 6 नवंबर ): भारत और अमेरिकी के बीच रिश्तों में मजबूती देखने को मिल रही है। चीन का भारत के समुद्री क्षेत्र में आक्रामक रुख को काउंटर करने के लिए नई दिल्ली और अमेरिका के बीच रिश्तों में और मजबूती देखने को मिल रही है। भारत और अमेरिकी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण श्रीलंका और मालदीव में एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। दोनों देश मालदीव में IS के बढ़ते प्रभाव पर भी कड़ी नजर रखे हुए हैं। 

चीन के इन इलाकों में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत और अमेरिका पेइचिंग के हस्तक्षेप पर कंट्रोल के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। मालदीव में चीन का बढ़ता प्रभाव ज्यादा चिंता की बात है। चीन मालदीव में आधारभूत ढांचा निर्माण और विकास के कार्यों के लिए मदद दे रहा है। हालांकि श्रीलंका में इस तरह के हालात नहीं हैं, लेकिन मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को चीन के कर्ज से कोई दिक्कत पेश नहीं आ रही है। 

इसके अलावा भारत तथा अमेरिका IS आतंकियों पर भी नजर रखने के लिए आपसी संबंध मजबूत कर रहे हैं। मालदीव के करीब 400 लोग सीरिया और इराक में IS की तरफ से लड़ने गए थे और अब वे फिर से मालदीव लौट रहे हैं। एक राजनयिक ने बताया कि मलादीव में कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों को इस बात का संदेह है कि ये IS आतंकी देश में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे सकते हैं। 

भारत और अमेरिका श्रीलंको को भी चीन के कर्ज के जाल से मुक्त कराने की कोशिश कर रहे हैं। जापान भी यहां एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक राजनयिक ने बताया, 'हमारे बीच बेहद अच्छे रिश्ते हैं। नई दिल्ली, वॉशिंगटन, तोक्यो और कोलंबों के बीच मजबूत सहयोग है।'