रियो: भारत को ज्ञान देने वाला चीन अब अपने 'फ्लाप' प्रदर्शन की बता रहा वजह

नई दिल्ली(21 अगस्त): पिछले दो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाले चीन का रियो में अब तक का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। लेकिन, चीन ने इस असफलता के लिए अजीबोगरीब वजह बताते हुए कड़ी प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदार ठहराया है।

- चीन ने अपने प्रदर्शन का आकलन करने का वादा करते हुए कहा कि बीते 20 सालों में उसके यह सबसे बुरा प्रदर्शन है। चीन ने रियो ओलंपिक में 410 ऐथलीट्स भेजे हैं, लेकिन गेम्स के आखिरी दिन तक चीन के पास 26 गोल्ड मेडल ही आए हैं। यह 1996 के अटलांटा ओलंपिक के बाद चीन का सबसे कमजोर प्रदर्शन है।

- इस बार के ओलंपिक में चीन दूसरे नंबर की रेस में ब्रिटेन से पिछड़ गया है। इस आंकड़े को लेकर चीनी मीडिया ने ओलंपिक दल की तीखी आलोचना की है। अमेरिका ने अब तक 43 गोल्ड जीते हैं, जबकि ब्रिटेन ने 27 गोल्ड हथियाए हैं। हालांकि मेडल्स की संख्या के मामले में चीन आगे है। चीन ने कुल 70 मेडल जीते हैं, जबकि ब्रिटेन ने 66 मेडल जीते हैं। 2008 के पेइचिंग ओलंपिक में चीन ने मेडल के मामले में अव्वल स्थान हासिल किया था। वहीं, 2004 और 2012 के मेडल में चीन ने दूसरा स्थान हासिल किया था।

- चीनी ओलंपिक कमिटी के चीफ लिउ पेंग ने कहा कि मानकों में बढ़ोतरी किए जाने से यह समस्या हुई है। लिउ ने कहा, 'यहां कुछ समस्याएं हमारे सामने आई हैं, जिनके बारे में हमने पहले ध्यान नहीं दिया। रियो ओलंपिक में हम बहुत ज्यादा मेडल नहीं जीत पाए हैं। हमने रियो ओलंपिक की चुनौतियों पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।' लिउ ने कहा, 'बीते कुछ सालों में कई देशों ने ओलंपिक को गंभीरता से लिया है। इसलिए इंटरनैशनल लेवल पर खेल का स्तर बढ़ गया है और प्रतिस्पर्धा कड़ी हो गई है। हमें अब नई मानसिकता अपनानी होगी नई समझ के साथ अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। हमें नए अनुभव और सीख की जरूरत है।'

- लिउ ने कहा कि चीन को अनुभव की कमी की कीमत चुकानी पड़ी है। चीन ने कहा कि हमारे करीब एक तिहाई ऐथलीट ऐसे हैं, जो पहली बार ओलंपिक खेल रहे हैं। लिउ ने कहा, 'हमने इन ऐथलीट्स को प्रशिक्षण दिया था, लेकिन शायद वह काफी नहीं था।' लिउ ने कहा, 'इन ऐथलीट्स के पास कड़ी प्रतिस्पर्धा में मानसिक तौर पर खुद को तैयार करने का अनुभव नहीं है।'