चीन के लिए 'बड़ा खतरा' बना उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण

नई दिल्ली(5 सितंबर): उत्तर कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण कर अमेरिका को उकसाने का काम कर रहा है। उत्तर कोरिया के इस आक्रामक रवैये ने उसके कथित सहयोगी चीन को पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा और असहज करने का काम किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह उत्तर कोरिया की सोची समझी रणनीति हो सकती है। इसके पीछे उसकी मंशा यह है कि चीन, उसके और अमेरिका के बीच गुप्त रूप से सीधी बातचीत का माध्यम बने।

- उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के खानदान का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है। वह परमाणु अस्थिरता का इस्तेमाल इस बात के लिए करता रहा है कि अमेरिका उसे गंभीरता से ले। हालांकि इसके चलते उसने कभी अपने पारंपरिक और इकलौते सहयोगी चीन को शर्मिंदा नहीं होने दिया। लेकिन रविवार को किम जोंग उन ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के लिए ऐसे वक्त में मुश्किल खड़ी कर दी जब वह ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे थे।

- ऐसे वक्त में जब चीन ग्लोबल पावर बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए है, किम जोंग की हरकतें उसके लिए शर्मिंदगी की वजह बन रही हैं। दुनिया में यह संदेश जा रहा है कि एक तरफ चीन शी चिनफिंग को एक 'फादर फिगर' के तौर पर पेश करता है, उन्हें ग्लोबल लीडर बताता है और दूसरी तरफ वह अपने 'सहयोगी' उत्तर कोरिया के चलते पैदा हो रहे परमाणु संकट को ही रोक पाने में नाकाम हैं।


- पेइचिंग में रेनमिन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर अमेरिकन स्टडीज के डायरेक्टर शी यिनहोंग ने कहा, 'उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे परमाणु और मिसाइल टेस्ट के चलते चीन के लिए काफी मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है।' उन्होंने कहा कि किम और शी के बीच कभी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन किम उनके लिए 'बड़ा खतरा' बन गए हैं। 

- हाल ही में उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र ने कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे जिनका चीन ने भी समर्थन किया था। एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि इस कदम के बाद उत्तर कोरिया ने 'अमेरिका से बातचीत के लिए' चिनफिंग पर और दबाव डालना शुरू कर दिया।