चीन पर नजर रखने के लिए भारत ने की तैयारी

नई दिल्ली(7 जनवरी): ऱफाल विमान के पहले स्क्वाड्रन का बेस ईस्टर्न सेक्टर में बनाएगा। फ्रांस से खरीदे गए इस फाइटर जेट्स की खासियत यह है कि वह न्यूक्लियर हथियारों को ढो भी सकता है।

- दरअसल, यह कदम भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत चीन को काउंटर करने के लिए पारंपरिक और न्यूक्लियर, दोनों तरह के हमलों की क्षमता को मजबूत करना है।

- बता दें कि भारत पहले ही सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स की तैनाती असम के तेजपुर और छाबुआ में कर चुका है। अब भारतीय वायु सेना ने योजना बनाई है कि 2019 के आखिर तक पहले 18 रफाल लड़ाकू विमानों को पश्चिम बंगाल के हाशिमपुरा बेस पर तैनात किया जाएगा।

- बीते साल सितंबर में फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये की डील हुई थी। इसके तहत, 2022 के मध्य तक वायुसेना को 36 राफेल विमान कई चरणों में मिलेंगे।

- भारत हालात के मद्देनजर इनमें कुछ अन्य फीचर्स जोड़ने की डिमांड की गई है। इनमें ऊंचाई वाले इलाकों में 'कोल्ड स्टार्ट' की सुविधा भी शामिल है। इसके अलावा, बाकी खूबियों के साथ राफेल एक ताकतवर विकल्प बनकर उभरता है, जो 9.3 टन के हथियार ढोने में सक्षम है। यह हवाई सुरक्षा से लेकर जमीनी हमले से जुड़े मिशनों के लिए बेहद कारगर है।

- एक अफसर ने बताया, 'हाशिमपुरा एयरबेस पर फिलहाल मिग-27 जेट्स हैं, जो अगले दो से तीन साल में रिटायर हो जाएंगे। उन्हें रफाल से रिप्लेस किए जाएंगे। रफाल को बनाने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने हाल ही में हाशिमपुरा का दौरा किया। इसका मकसद इस जेट के मेंटेंनेंस और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के हालात की समीक्षा करना था।'

- अफसर ने बताया, 'यूपी स्थित सरस्वा बेस उन जगहों में शामिल है, जहां रफाल की दूसरी टुकड़ी तैनात करने के बारे में विचार किया जा रहा है।'