चीन-पाक आर्थिक गलियारे पर भारत की दो टूक, दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करे चीन

बीजिंग (22 फरवरी): भारत और चीन के बीच पहली बार रणनीतिक वार्ता हो रही है। भारतीय दल की अगुआई विदेश सचिव एस जयशंकर कर रहे हैं। इसकी पहली बैठक में विदेश सचिव ने उन सभी मुद्दों को चीनी पक्ष के सामने एक के बाद एक पूरी साफगोई से रखा जो पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बने हुए हैं। उन्होंने आतंकी मौलाना मसूद अजहर का मुद्दा भी उठाया और पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने वाले चीन पाकिस्तान इकोनामिक कारीडोर (सीपीईसी) का मुद्दा भी था।

मजेदार बात यह है कि वार्ता में चीन ने भारत से भी इस रोड व आर्थिक परियोजना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। जयशंकर का जवाब यह था कि, ''हम चीन के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं लेकिन असलियत यह है कि यह परियोजना एक ऐसे भौगोलिक हिस्से से गुजर रही है जो भारत के लिए काफी संवेदनशील है।

भारत ने चीन को भारत की प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने की नसीहत देते हुए कहा कि पाकिस्तान के सहयोग से बनाया जा रहा उसका आर्थिक गलियारा जिस क्षेत्र से गुजरता है, वह भारत का हिस्सा है।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने द्वितीय रायसीना संवाद में अपने संबोधन के बाद सवालों के जवाब में चीन को दो टूक शब्दों में कहा कि उसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के मुद्दे पर भारत की संवेदनशीलता को समझना होगा। विदेश सचिव ने कहा कि चीन अपनी संप्रभुता से जुड़े मसलों को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशील है। हम अपेक्षा करते हैं कि वे भी अन्य लोगों की संप्रभुता का सम्मान करें।