इतिहास के सबसे बड़े नौसैनिक युद्धाभ्यास से घबराया ड्रैगन, चीनी मीडिया ने बताया खतरनाक

चेन्नई (10 जुलाई): बंगाल की खाड़ी में आज इतिहास बनने जा रहा है। भारत-अमेरिका और जापान की नौसैना ने चेन्नई के पास समुद्र में दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा नौसैनिक युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। भारत-अमेरिका और जापान ने इस साझे सैन्याभ्यास को ऑपरेशन मालाबार का नाम दिया है। भारत अमेरिका और जापान के जंगी बेड़े और लड़ाकू विमानों के साथ चेन्नई के तट के करीब हो रहे इस अभ्यास से दुश्मन देश बौखला गया है। इस अभ्यास के दौरान लगभग 20 जंगी जहाज और दर्जनों फाइटर जेट्स मंडराएंगे तो इनकी गर्जना बीजिंग तक सुनाई देगी।

हिंद महासागर को अपना जागीर और सीमा पर भारत की मुश्कले बढ़ा रहे चीन के इस ऑपेशन मालाबार से होश उड़ गए हैं। इससे चीन घबराहट में है। चीन के एक अंग्रेजी अखबार ने इसे चीन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस युद्धभ्यास पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है लेकिन उन्हें आशा है कि यह सब क्षेत्र की शांति के लिए होगा।

लेकिन चीन अखबार ने लिखा है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास करने से चीन के साथ बने व्यापारिक संबंध को खतरे में डाल सकता है। इतना ही नहीं यह चीन की सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित हो सकता है। चीन अखबार ने लिखा है कि चीन जब डोकलाम सड़क बनाना चाहता है तो भारत इसका यह कहकर विरोध करता है कि यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। लेकिन अब चीन को खुद सोचना होगा कि भारत की ओर से आयोजित किए जा रहे बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास से उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है।

चीनी मीडिया ने लिखा है कि तीन देशों की नेवी द्वारा किया जा रहा यह अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है। बंगाल की खाड़ी आयोजित हो रहे 10 दिवसीय इस युद्धाभ्यास को चीनी मीडिया ने अपने देश के लिए बड़े खतरे का संकेत बताया है। चीनी अखबार में यह भी लिखा है कि अमेरिका ने भारत को युद्धक सामग्री ले जाने वाले लड़ाकू विमान देने की स्वीकृति दे दी है। भारत ये लड़ाकू विमान 365 अरब डॉलर में खरीद रहा है। इतना ही नहीं अमेरिका 2 अरब डॉलर में भारत को कई टोही ड्रोन भी देने जा रहा है। अब चीन को अपनी सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत है।