चीन की चालबाजी, हिंद महासागर में भारत से करना चाहता है दोस्ती

नई दिल्ली (11 जुलाई):  चीन कब कौन सी चाल चले और कहां किसे धोखा दे दे कहना मुश्किल है। डोकलाम में जारी तनातनी के बीच चीन ने हिंद महासागर में भारत से दोस्ती करना चाहता है। लेकिन विश्वासघाती चीन पर भारत के लिए भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है। दरअसल साउथ चाइना सी में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के बाद अब चीन की नजर हिंद महासागर पर है। चीन ने हिंद महासागर में अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों की गतिविधि बढ़ा दी है।

के समुद्री क्षेत्र के बेहद समीप चीन की सेना के बेड़े की बढ़ती मौजूदगी को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच चीन की नौसेना की नजर अब हिंद महासागर पर है। चीन की नौसेना हिंद महासागर में सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत से हाथ मिलाना चाहती है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी यानी PLAN के अधिकारियों ने तटीय शहर झानजियांग में अपने कूटनीतिक दक्षिण सागर बेड़े अड्डे पर पहली बार भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बात करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए हिंद महासागर एक साझा स्थान है। चीन के SSF के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल ऑफिस कैप्टन लियांग तियानजुन ने कहा है कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बारे में उन्होंने कहा कि चीन की सेना का रुख रक्षात्मक है ना कि आक्रामक।

उन्होंने मेरी राय में चीन और भारत हिंद महासागर की सुरक्षा में संयुक्त योगदान दे सकते हैं। उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब चीनी नौसेना ने अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर विस्तार की योजना शुरू की है।

चीन ने हिंद महासागर में होर्न ऑफ अफ्रीका के जिबूती में पहली बार नौसैन्य अड्डा स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि जिबूती अड्डा चीन के नौसैनिकों के लिए आराम करने का स्थान भी बनेगा। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक दबदबे के बीच सैन्य अड्डा बनाना वैश्विक पहुंच बढ़ाने की पीएलएएन की महत्वाकांक्षा का हिस्सा है।