चीन की भारत को खुली चेतावनी- कश्मीर मसले पर देगा दखल!

डॉ. संदीप कोहली

नई दिल्ली (2 मई): वन बेल्ट वन रोड (OBOR) पर भारत की आपत्ति और दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा से तिलमिलाए चीन ने कश्मीर मुद्दे पर भारत को खुली धमकी दी है। चीन ने कहा है कि वह अब कश्मीर मुद्दे में सीधा दखल देगा। अबतक चीन पाकिस्तान के पक्ष में जो बात बंद जुबान से बोल रहा था अब वो बात खुलकर दुनिया के सामने रख रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के जरिए चीन कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने वाला है। अखबार के मुताबिक चीन हमेशा अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का पालन करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने निवेश की रक्षा को नजरअंदाज करे और कान बंद कर बैठ जाए। चीन ने बड़े पैमाने पर गिलगित-बल्तिस्तान से होकर जाने वाले वन बेल्ट, वन रोड में भारी निवेश किया है। अब वो इस क्षेत्र में आने वाले मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेगा जिसमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल है। इसके लिए चीन ने भारत पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ बनने की ख्वाहिश भी जताई है। गौरतलब है की वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट चीन की वह महत्वकांशी प्रोजेक्ट है जिसके जरिए चीन सड़क मार्ग द्वारा सीधा एशिया, अफ्रीका और यूरोप से जुड़ना चाहता है। इसके लिए 14-15 मई को चीन बीजिंग में वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट पर सम्मेलन भी करने जा रहा है।


भारत CPEC पर जता चुका आपत्ति- भारत ने पिछले साल दिसंबर में  चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने नियमित ब्रीफिंग में कहा था कि यह गलियारा चीन की पहल है और यह भारत के संप्रभुता वाले क्षेत्र से गुजरता है जिसके बारे में हमने अपनी चिंताओं से चीन और पाकिस्तान दोनों को अवगत करा दिया है।


चीन भारत को दे चुका लालच- 20 मार्च को चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक लेख छपा। लेख के मुताबिक नई दिल्ली वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट पर खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो उसे फायदा हो सकता है। अगर भारत अपने आपको इससे अलग रखता है तो वह चीन के बढ़ते दबदबे को सिर्फ देखता रह जाएगा।


क्या है वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट (OBOR)...

चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC का एक हिस्सा है जो पाकिस्तान के गिलगिट-बल्तिस्तान में बन रहा है। गिलगिट-बल्तिस्तान कश्मीर का वो हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान अवैध कब्जा जमा कर बैठा है। पाक सरकार ने इस क्षेत्र को ऑटोनॉमस रीजन घोषित कर रखा हैे लेकिन इसके बावजूद उसने चीन के सहयोग से इस क्षेत्र में अवैध रूप से दखल दे रखी है।


    * चीन 14—15 मई को बीजिंग में OBOR शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है।

    * इस शिखर सम्मेलन में 28 राष्ट्रपतियों एवं प्रधानमंत्रियों के भाग लेने की संभावना है।

    * वन बेल्ट वन रोड यानी OBOR परिजोयना चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर योजना का हिस्सा है।

    * OBOR परिजोयना के जरिए चीन सड़क मार्ग से सीधा मध्य एशिया और यूरोप से जुड़ जाएगा।

    * अभी चीन साइबेरियन रेल लाइन के जरिए अपना माल 12 हजार किमी दूर लंदन भेजता है।

    * लेकिन सर्दियों में साइबेरियन रेल लाइन ठप हो जाती है तो चीन माल समुद्री मार्ग के जरिए भेजता है।

    * लेकिन CPEC पर वन बेल्ट वन रोड परिजोयना चालु हो जाने के बाद 12 महीने सफर जारी रहेगा।

    * साथ ही अभी 12 हजार किमी का जो सफर तय करना पड़ता है वो घटकर 8 हजार किमी रह जाएगा


CPEC पर भारत चीन आमने सामने- CPEC पाकिस्तान के कराची, ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा। CPEC पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरता है। इसी कारण भारत को आपत्ति है, इससे पीओके में चीन का प्रभुत्व बड़ रहा है। पीएम मोदी CPEC के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एतराज जता चुके हैं। CPEC पर भारत के ऐतराज पर रूस भी उसके समर्थन में खड़ा रहा है। चीन इस परियोजना के तहत पाकिस्तान में 3 लाख करोड़ रुपए निवेश कर चुका है। इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी 3000 किमी का रेल-सड़क नेटवर्क बन चुका है। दिसंबर 2016 को चीन ने पाकिस्तान अपनी पहली रेलगाड़ी भी भेज दी थी। उसने दक्षिण में स्थित कुन्मिंग से कराची तक 3500 किमी की दूरी तय की गई।


CPEC से सिर्फ चीन को होगा फायदा- चीन ने सीपीईसी परियोजनाओं में 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है। इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा। सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा। अभी चीन को ग्वादर पोर्ट जाने के लिए 12 हजार किमी के समुद्री मार्ग से सफर तय करना पड़ता है। सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चीन को अपने बॉर्डर से सिर्फ 1800 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। बीजिंग से ग्वादर पोर्ट की दूसरी महज आधी से भी कम (5200 किमी) रह जाएगी। चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है। चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है। चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है।