चीन ने लॉन्च किया दुनिया का पहला हैक प्रूफ सैटेलाइट

बीजिंग (16 अगस्त): चीन ने दुनिया का पहला हैक प्रूफ क्वांटम सैटेलाइट लॉन्च किया। चीन का दावा है कि इससे भेजे जाने वाले मैसेज को न तो डिकोड किया जा सकता है और न ही इस सैटेलाइट को हैक किया जा सकता। चीन ने इसकी लागत नहीं बताई है, लेकिन बताया जा रहा है कि इसकी रिसर्च पर ही 101 बिलियन डॉलर (करीब 675 हजार करोड़ रुपए) खर्च हुए हैं।

अमेरिका और जापान को पीछे छोड़ा... - क्वांटम सैटेलाइट को लॉन्च करके चीन ने जापान और अमेरिका को न सिर्फ पीछे छोड़ दिया है, बल्कि उनकी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। - अमेरिका, जापान, कनाडा और यूरोप के कई देश क्वांटम कम्युनिकेशन सिस्टम डेवलप करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां की सरकार इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाना नहीं चाहतीं। - चीन ने सैटेलाइट की लागत नहीं बताई है, लेकिन वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक सिर्फ इसकी रिसर्च पर ही 101 बिलयन डॉलर (675 हजार करोड़ रुपए) खर्च हुए हैं। - बताया जा रहा है कि चीन ऐसे 19 सैटेलाइट और लॉन्च कर सकता है। 2030 तक वह क्वांटम सैटेलाइट का एक ग्लोबल नेटवर्क तैयार करना चाहता है। - चीन ने इस सैटेलाइट का नाम ‘मिसिअस’ रखा है। मिसिअस 5वीं सदी में चीन के महान फिलॉस्फर और साइंटिस्ट रहे।

क्यों बनाया यह सैटेलाइट? - दरअसल, सीआईए के पूर्व इम्प्लॉई एडवर्ड स्नोडेन ने कुछ साल पहले खुलासा किया था कि अमेरिका चीन के सैटेलाइट्स की इन्फॉर्मेंशन को डिकोड कर लेता है। - इसके बाद से ही चीन ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप करने की कोशिश कर रहा था, जिसे डिकोड या एन्क्रिप्ट न किया जा सके।

डाटा से छेड़छाड़ हुई तो वह खुद खत्म हो जाएगा... - चीन का दावा है कि क्वांटम सैटेलाइट में दुनिया की सबसे सिक्योर टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है। - इसमें डाटा कम्युनिकेशन फोटोन के जरिए होगा। फोटोन को न तो अलग किया जा सकता है और न ही उसकी प्रतिकृति (रिप्लिका) बनाई जा सकती है। - सैटेलाइट से भेजे डाटा को जमीन पर मौजूद ऑथराइज्ड बेस पर ही डिकोड किया जा सकेगा। - डाटा अनऑथराइज्ड तरीके से रिसीव करने की या डिकोड करने की कोशिश की गई तो यह खुद ही खत्म हो जाएगा। साथ ही बेस सेंटर को पता चल जाएगा।