चीन ने ताइवान पर सैन्य दबाव बढ़ाने के लिए शुरु किया युद्धाभ्यास

नई दिल्ली (5 मार्च): ताइवान में उठ रही आजादी की आवाज़ को दबाने के लिए चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेर कर समुद्र में  तीन दिन का सैनिक अभ्यास शुरु कर दिया। हालांकि चीनी अधिकारियों ने इस अभ्यास का लक्ष्य संभावित हमले से निपटने के लिए सेना की तैयारी बताया है, लेकिन यह अभ्यास ताइवान को स्वाधीन कराने की इच्छा रखने वालों के लिए साफ़ संदेश है।

कई युद्धक विमान और युद्धपोत दो रोज़ पहले ताइवान द्वीप के चारों ओर जलक्षेत्र और प्रशांत महासागर में सैन्य अभ्यास में शामिल हुए। पिछले साल जून में ताइवान में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के सत्ता में पहुंचने से ताइवान और चीन के बीच तनाव का नया दौर शुरु हो गया। ताइवान की राष्ट्रपति त्साय ईंग विन ने अपने मतदाताओं से कहा था कि ताइवान की संप्रभुता पर बीजिंग से कोई समझौता नहीं करेंगी। यह ऐसी हालत में था कि अमरीका में ट्रम्प ने जिस हद तक मुमकिन था ताइवानी राष्ट्रपति और ताइवान में प्रजातंत्र व स्वतंत्र अर्थव्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि वाइट हाउस को नहीं लगता कि वह अखंड चीन की नीति पर हमेशा बीजिंग का साथ देगा।

चीन-ताइवान संबंध में खटास उस समय बढ़ गयी जब अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में ट्रम्प ने चीन और एशिया के संबंध में अमरीका की सैन्य स्ट्रैटिजी पर बल दिया। दक्षिणी चीन सागर में अमरीकी युद्धपोत की मौजूदगी और पिछले हफ़्ते कार्ल विन्सन विमान वाहक पोत का इस समुद्री क्षेत्र में भेजे जाने से इस बात की पुष्टि होती है कि अमरीका की सैन्य स्ट्रैटिजी पूर्वी एशिया पर केन्द्रित है। चीन का इस बिन्दु पर ध्यान है कि ताइवान में सत्ता में मौजूद डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के संचालक ताइवान की सेना को बेहतर बनाने के लिए क़दम उठाएंगे। इस बात के मद्देनज़र इस बात की पूरी संभावना है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिन पिंग पहली मार्च से 10 मार्च तक चीन की नेशनल पीपल्ज़ कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में चीनी सेना का बजट बढ़ाएंगे और ताइवान के स्वाधीनता हासिल करने के हर प्रकार के क़दम के ख़िलाफ नए सुरक्षा उपाय अपनाएंगे।