अफगानिस्तान में बनाएगा सैन्य अड्डा चीन, यह डर है बड़ी वजह

नई दिल्ली ( 3 फरवरी ): IS आतंकियों से डरे और अफगानिस्तान से आतंकियों के आने पर रोक लगाने के बहाने चीन अपने पड़ोसी देश में सैन्य अड्डा बनाने के लिए काबुल से बातचीत कर रहा है। अफगान अधिकारियों ने बताया कि चीन अफगानिस्तान के सुदूर वाखान कॉरीडोर में सैन्य अड्डा बनाना चाहता है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के सैनिकों को इस इलाके में संयुक्त गश्त लगाते देखा गया है।

अफ्रीका के जिबूती में पहला विदेशी सैन्य अड्डा बनाने के बाद वह अब अफगानिस्तान में दूसरा बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। इससे साफ हो गया है कि अफगानिस्तान की धरती पर चीन की भूमिका बढ़ने वाली है। अफगान अधिकारियों ने बताया है कि अफगानिस्तान से चीन में आतंकियों के आने पर रोक लगाने के लिए पेइचिंग मिलिटरी बेस बनाने पर बात कर रहा है। चीन की चिंता यह है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी अफगानिस्तान के रास्ते देश में दाखिल हो सकते हैं।

अफगानिस्तान का यह सर्द और बंजर इलाका चीन के तनावपूर्ण शिंजियांग क्षेत्र से सटा हुआ है। यह इलाका अफगानिस्तान के बाकी हिस्से से इतना कटा हुआ है कि यहां के रहने वालों को अफगान संघर्ष की जानकारी ही नहीं है। चीन की चिंता इस बात को लेकर है कि यहां रहने वाले लोगों के शिंजियांग के लोगों से काफी घनिष्ठ संबंध हैं और लोग एक दूसरे की तरफ आते-जाते रहते हैं। 

गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग आर्थिक और भूराजनीतिक दबदबा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए चीन दक्षिण एशिया में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। ऐसे में अगर आतंकियों से चुनौती मिलती है तो चीन के मंसूबे को झटका लग सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान से क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, ऐसे में इस तरह के किसी कदम को सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

पेइचिंग की चिंता यह है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के उइघुर समुदाय के लोग वाखान के रास्ते शिंजियांग में आकर हमले करते हैं। चीन को डर है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी इराक और सीरिया से भागकर मध्य एशिया और शिंजियांग से होकर अफगानिस्तान पहुंच सकते हैं। यही नहीं, वाखान के रास्ते आतंकी चीन में भी दाखिल हो सकते हैं। 

अफगान रक्षा मंत्रालय के उपप्रवक्ता मोहम्मद रदमनेश ने कहा कि अफगान और चीन के अधिकारियों ने दिसंबर में पेइचिंग में इस योजना पर चर्चा की थी लेकिन विस्तार से बातचीत अब भी जारी है। उन्होंने बताया, 'हम बेस बनाने की इजाजत देंगे लेकिन चीन की सरकार ने हमें वित्तीय मदद के साथ ही उपकरणों व अफगान सैनिकों को प्रशिक्षण देने का आश्वासन दिया है।' काबुल में चीनी दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केवल इतना कहा कि पेइचिंग अफगानिस्तान में क्षमता निर्माण में शामिल है। गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारी पहले ही अफगानिस्तान में चीन की भूमिका का स्वागत कर चुके हैं।