सामने आयी चीन की चोरी 'डोकलाम पर तथ्यों को छुपा रहा है ड्रैगन'

नई दिल्ली (8 जुलाई): डोकलाम विवाद पर चीन की ओर से तथ्यों को छुपाए जाने की बात सामने आ रही है। दरअसल जिस 'सिक्किम-तिब्बत संधि 1890' के दस्तावेज दिखाकर चीन डोकलाम पर दावा करता है, उस पर तिब्बत की सरकार ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।  बीते 16 जून को चीनी सैनिकों ने डोकलाम में एक सड़क निर्माण का काम शुरू किया था जिसके बाद से इस इलाके में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। इस इलाके पर भूटान का भी दावा है। 


1960 तक भूटान-तिब्बत और सिक्किम-तिब्बत सीमाओं को लेकर किसी संधि पर सहमति नहीं दी थी। विश्लेषकों का कहना है कि यह एक और तथ्य है कि डोकलाम पर दावा करते वक्त चीन ने ऐसे किसी दस्तावेज का जिक्र नहीं किया। तिब्बत मामलों के जानकार और इतिहासकार क्लॉड आर्पी कहते हैं, 'तिब्बत की सरकार ने 1890 के समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था क्योंकि उसे इसकी जानकारी नहीं दी गई थी या इसका हिस्सा नहीं बनाया गया था।' आर्पी ने बताया कि संधि से कुछ साल पहले ब्रिटिश और तिब्बती सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ था, और इसलिए यह एक वजह हो सकती है कि तिब्बती सरकार ने संधि को नहीं स्वीकार किया था। चीन यह मानकर चल रहा था कि संधि के लिए तिब्बत की स्वीकृति की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इस पर हस्ताक्षर करने के लिए केंद्र सरकार ने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अपना राजदूत भेज दिया था।