'सिल्क रूट' पर औंधे मुंह गिरा चीन, श्रीलंका में रोकने पड़े दोनों प्रोजेक्ट

नई दिल्ली (17 फरवरी): 'सिल्क रूट' के तहत  श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट का विकास और इंडस्ट्रियल जोन बनाने की चाइनीज योजना अधर में लटक गयी है। श्रीलंका में भूमिअधिग्रहण को लेकर विपक्ष और आम लोगों के विरोध के बाद चीन को 1.1 बिलयन डॉलर वाले प्रॉजेक्ट को कानूनी और राजनीतिक बाधा दूर होने तक रोकना पड़ा है। दोनों देशों के बीच पोर्ट विकसित करने को लेकर एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें 80 फीसदी हिस्सेदारी चीन की एक सरकारी कंपनी की होगी। इसके अलावा पेइचिंग यहां 15,000 एकड़ में इंडस्ट्रियल जोन भी विकसित करना चाहता है।

श्रीलंका के सामने घरेलू विरोध काफी बढ़ गया है। विरोधियों को ट्रेड यूनियन और पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे का समर्थन प्राप्त है। राजपक्षे के एक करीबी विधायक सरकार के प्लान को कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं। अब पेइचिंग ने दोनों योजनाओं को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा है कि जब तक श्रीलंका घरेलू मुद्दों को न सुलझा ले, बात आगे नहीं बढ़ेगी। श्रीलंका के वित्त मंत्री रवि करुणायके ने कहा, 'चीन ने कहा था कि जब वह पोर्ट की शुरुआत करेंगे तो उन्हें जमीन भी चाहिए।' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि चीन ने इसे पूर्व शर्त के रूप में नहीं रखा था। उधर, श्रीलंका में चीन के राजदूत यी शांगलियांग ने कहा, 'दोनों डील एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यदि पोर्ट होगा और इंडस्ट्रियल जोन नहीं तो हम पोर्ट का क्या करेंगे? इसलिए दोनों जरूरी हैं।'