चीन की खौफनाक साजिश, भारत को बाढ़ में डुबोने की कर रहा है तैयारी !

नई दिल्ली (18 जुलाई): डोकलाम में भारत के तल्ख तेवर से ड्रैगन बौखला गया है। चीन भारत के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रहा है। जानाकारी के मुताबिक चीन मानसून के दौरान ऊंचाई पर स्थित झीलों और नदियों की बाढ़ को भारत के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। चीन से निकल कर नेपाल और भारत की सरहद के अंदर आने वाली इन नदियों से अचानक आने वाली बाढ़ से बहुत नुकसान हो सकता है। चीन के ट्रांसबाउंड्री निगरानी नीति का पालन न करने से केंद्रीय जल आयोग के फ्लड मैनेजमेंट आर्गेनाइजेशन को चीन से बाढ़ और झीलों के संबंध में पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

विज्ञानियों ने नदियों के किनारे वॉटर टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए जाने की जरूरत बताई है। साथ ही निगरानी सिस्टम मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव दिया है। चीन के ऊंचाई वाले इलाकों से ब्रह्मपुत्र, कोसी, गंडक समेत कई नदियां निकलकर भारत की सीमा में आती हैं। मानसून के दौरान अतिवृष्टि से इन नदियों पर अस्थायी बांध बन जाते हैं। इनके आसपास बनी झीलें अचानक टूट जाती हैं, जिससे निचले इलाकों में खौफ नाक बाढ़ आ जाती है। बांध और झील अचानक टूटते हैं तो लोगों को संभलने का मौका नहीं मिल पाता।

भारत में वर्ष 2002 में ब्रह्मपुत्र की बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई थी। उस वक्त नेपाल, भारत और चीन ने ट्रांसबाउंड्री निगरानी नीति पर सहमति जताई थी। इसके तहत झील, बांध टूटने, ऊंचाई वाले इलाकों में बादल फटने, अतिवृष्टि से बाढ़ आने की सूचना शेयर करने का प्रावधान है, लेकिन चीन ने कभी भी इसका पालन नहीं किया। विज्ञानियों ने जब ब्रह्मपुत्र के पानी की जांच की तो पता चला कि यह पानी तो किसी पुरानी झील का है, जिसके बारे में चीन ने भारत को कभी कोई जानकारी नहीं दी थी।

इस संबंध में पूर्व में भी चिंता जताई जा चुकी है। मौजूदा स्थिति में चीन दादागीरी वाला रवैया अपना रहा है। चीन के जलस्रोतों को हथियार के रूप में प्रयोग करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मानसून में तेजी आ रही है। ऐसे में फ्लैश फ्लड को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। नदियों के किनारे लैब स्थापित करके इनफॉर्मेशन सिस्टम मजबूत किया जाना चाहिए।