तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी में चीन! साउथ चाइना सी में मिसाइलों का बना रहा गोदाम

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (22 फरवरी): दक्षिण चीन सागर में बदले समीकरणों ने चीन की चिंता बड़ा दी है। बौखलाया चीन एक तरफ दुनिया के सामने अपनी सैन्य शक्ति दिखाकर अपना वर्चस्व साबित करने की कोशिश कर रहा है। तो दूसरी तरफ बड़े-बड़े हथियारों का खुफिया तौर पर जमावड़ा तैयार कर रहा है। चीन ने दक्षिणी चीन सागर में बने कृत्रिम द्वीप पर दो दर्जन भवनों के निर्माण किया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि चीन इन भवनों का इस्तेमाल सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रखने के लिए करेगा। अमेरिकी खुफिया विभाग के दो अफसरों ने यह जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दी है। खबर के मुताबिक चीन ने इन द्वीपों पर 66 फीट लंबी और 33 फीट ऊंची इमारतों का निर्माण किया है। चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों की ऊंचाई 30 फीट है, मिसाइलें इन इमारतों में फिट बैठेंगी। पेंटागन ने इस पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर में सैन्यीकरण के पक्ष में नहीं है और सभी दावेदारों से इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून को मानने का अनुरोध करता है। अब सवाल उठता है क्या चीन थर्ड वर्ल्ड वॉर की तैयारी कर रहा है, क्यों विवादित क्षेत्र में तैनात कर रहा है बैलिस्टिक मिसाइल-

    * चीन ने दक्षिणी चीन सागर में सात कृतिम द्वीप बनाए हैं।

    * अब इन द्वीपों पर 24 इमारतों का निर्माण किया है।

    * इन इमारतों की लंबाई 66 फीट और ऊंचाई 33 फीट है।

    * इन इमारतों पर एंटी एयरक्राफ्ट गन तैनात की गई हैं।

    * साथ ही कृत्रिम द्वीपों पर हवाई पट्टियां भी बना ली हैं।

    * अमेरिकी खुफिया विभाग के सुत्रों ने यह खुलासा किया है।

    * इन इमारतों का इस्तेमाल मिसाइल भंडारण के लिए हो रहा है।

    * एंटी मिसाइल सिस्टम समेत कई हथियार तैनात कर लिए हैं।

चीन समुद्र में बड़ा रहा अपनी ताकत- चीन साउथ चाइना सी पर अपने दावे को और मजबूत करने और इस क्षेत्र में अपने दखल को बढ़ाने के लिए तीसरा विमानवाहक पोत का निर्माण कर रहा है। चीन का यह कदम दक्षिण चीन सागर विवाद में तेल में घी का काम करेगा। जो जापान, ताइवान, वियतनाम, कम्बोडिया, फिलीपींस समेत कई देशों के लिए खतरा साबित होगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीनी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी सूचनाओं के आधार पर ये खबर प्रकाशित की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस आधुनिक विमान वाहक पोत का निर्माण शंघाई में किया जा रहा है। इस विमानवाहक पोत की सबसे खास बात है कि यह अमेरिकी मॉडल पर आधारित है।

चीन ने बैलिस्टिक मिसाइल के साथ की सबसे बड़ी मिलिट्री ड्रिल- चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली में सोमवार को यह खबर छापी है साथ ही वेबसाइट पर एक वीडियो भी अपलोड किया गया है। खबर के मुताबिक इस युद्धाभ्यास में दो तरह के DF-16 बैलिस्टिक मिसाइल को दिखाया गया है। ऐसा तीसरी बार है जब सार्वजनिक तौर पर इस तरह DF-16 को दिखाया जा रहा है। सबसे पहले इस मिसाइल को सितंबर 2015 में दुनिया के सामने बीजिंग में हुई मिलिट्री परेड में दिखाया गया था। वैसे चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी PLA जो अपने हथियारों से संबंधित सूचनाओं को काफी गोपनीय रखता है। उसने दुनिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइल से किए जा रहे सेना के युद्धाभ्यास का वीडियो जारी किया है।

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन दिखा रहा है आक्रामक तेवर- डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही चीन लगातार ताइवान को लेकर आक्रामकता दिखा रहा है। ताइवान के राष्ट्रपति के साथ ट्रंप की बातचीत के बाद से चीन लगातार यह रुख अपना रहा है।  ट्रंप की इस बातचीत पर आपत्ति जताते हुए चीन ने अपने फर्स्ट एयरक्राफ्ट कैरियर को ताइवान जलडमरूमध्य भेजा था।  साथ ही अपना एयरक्राफ्ट प्रशांत महासागर में स्थित फर्स्ट आइलैंड चेन में भी भेजा। इसके अलावा, चीन ने विवादित दक्षिणी चीन सागर क्षेत्र में भी नौसेना अभ्यास किया। चीन ने रूस के साथ सटी अपनी सीमा के पास एक लंबी दूरी के मिसाइल को भी तैनात किया है। रूस की मीडिया का कहना है कि इस मिसाइल का निशाना अमेरिका की ओर है।

साउथ चाइना सी विवाद...

    * चीन ने 1940 के दशक में दक्षिण चीन सागर के इलाको को अपने मैप में शामिल कर लिया।

    * साउथ चाइना सी दुनिया का  तीसरा सबसे महत्व वाला समुद्री रास्त है।

    * दक्षिण चीन सागर के करीब 90 फीसद हिस्से को चीन अपना क्षेत्र बता रहा है।

    * इसके बाद से चीन पूरे इलाके पर अपना दावा जताने लगा, वहाँ उसने सैनिक अडडे बनाए।

    * बडे पैमाने पर अतंराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर मछली पकडने का काम चलाने लगा।

    * फीलिपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रूनेई जैसे देश चीन के दावे को खारिज करते रहे है।

    * 2013 में फीलिपींस इस मामले को अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण में ले गया था।

    * बाद में चीन ने न्यायाधिकरण के फैसले को मानने से माना कर दिया।

    * 1982 के यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी का कहना है।

    * देशों को अपने समुद्री तटों से 200 नॉटिकल मील तक समुद्री संसाधनों की मंजूरी होगी।

    * इस संधि को चीन, वियतनाम, फिलीपीन्स और मलयेशिया सभी ने मंजूर किया है।

    * हालांकि इस संधि को अमेरिका ने मंजूर नहीं किया है इसे अमेरिकी संप्रभुता को खतरा बताया।

    * चीन का भी कहना है कि उसे एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन के भीतर निगरानी करने का हक है।

चीनी की हिंद महासागर पर नजर...

    * चीन पाकिस्तान के जरिए हिंद महासागर में घुसपैठ कर चुका है।

    * चीन पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह विकसित कर रहा है।

    * ग्वादर तक जाने के लिए चीन हिंद महासागर का रास्ता इस्तेमाल करता है।

    * हिंद महासागर में हर तीन महीने में चार चीनी पनडुब्बियां दिखाई देती हैं।

    * पनडुब्बियां अंडमान द्वीप समूह के पास मलक्का स्ट्रेट्स में देखी गई हैं।

    * मलक्का स्ट्रेट्स को साउथ चाइना सी का इंट्री गेट माना जाता है।

    * यहीं से होकर चीन को 80 फीसदी ईंधन की सप्लाई होती है।

    * आप समझ सकते हैं कि ये रास्ता चीन के लिए कितना अहम है।