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भारत के खिलाफ चीन की साजिश, अब चली ये नई चाल

नई दिल्ली ( 30 अक्टूबर ): डोकलाम विवाद के बाद चीन अब भारत को को परेशान करने के दूसरे तरीके खोज रहा है। चीन उत्तर-पूर्व चीन में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को शिनजियांग प्रांत के बंजर इलाके में डायवर्ट करने के लिए 1,000 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की योजना बना रहा है। 

चीनी इंजीनियर उस तकनीक का परीक्षण कर रहे हैं, जिसकी मदद से एक हजार किलोमीटर लंबी सुरंग की मदद से ब्रह्मपुत्र नदी का पानी झिनजियांग पहुंचाया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को खुद चीनी मीडिया ने दी। हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया, पर्यावरणविदों ने झिनजियांग के हालात अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसे होने की आशंका जताई है। ऐसे में तिब्बत के पठार से गुजरने वाली नदियों और झरनों का पानी झिनजियांग में पहुंचाने के लिए नहर व सुरंग बनाने की योजना है। 

रिपोर्ट में कहा गया कि झिनजियांग की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए दक्षिण तिब्बत से बहने वाली यारलुंग सांगपो नदी (भारत में दाखिल होने पर ब्रह्मपुत्र नाम से जानी जाती है) की धारा मोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इससे झिनजियांग के तकलीमाकन के रेगिस्तान में पानी पहुंचाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना की रूपरेखा शोधकर्ता वांग वेई ने तैयार किया है। रिपोर्ट को मार्च में केंद्रीय सरकार को सौंपी जा चुकी है। इस परियोजना से 100 से अधिक वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं। टीम का नेतृत्व सुरंग विशेषज्ञ वांग मेंगशु कर रहे हैं। 

खतरनाक योजना  चीनी शोधकर्ताओं की ओर से तैयार रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश सीमा के नजदीक दक्षिण तिब्बत के सांगरी कांउटी से नदी की धारा को मोड़ने का प्रस्ताव है। शोधकर्ताओं ने कहा, सांगरी काउंटी अपेक्षाकृत सपाट है और इस तरह की योजना के लिए सबसे अधिक मुफीद है। यहां पर नदी के बीच में एक कृत्रिम द्वीप भी बनाने का प्रस्ताव है, जहां पर नदी का गाद साफ करने के लिए उपकरण स्थापित किए जाएंगे और साफ पानी को सुरंग के रास्ते झिनजियांग भेजा जाएगा।

पूर्वाभ्यास शुरू  चीनी सरकार ने इस साल अगस्त में यूनान प्रांत में 600 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का कार्य शुरू किया है। शोधकर्ताओं ने इसे ब्रह्मपुत्र नदी का पानी मोड़ने के लिए प्रस्तावित 1000 किमी लंबी सुरंग का पुर्वाभ्यास करार दिया है। इस दौरान सुरंग खोदने के उपकरणों और तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। 

चीन का तर्क  चीन का तर्क है कि इस सुंरग के बनने से भारतीय क्षेत्र में आने वाले बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकेगा। साथ ही उत्तर में गोबी मरुस्थल और दक्षिण में तकलीमाकन मरुस्थल को इंसानी बसावट के लायक बनाया जा सकेगा। 

भारत की चिंता को बल भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की ओर से बांध बनाने की योजनाओं पर चिंता जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। भारत का मानना है कि चीन नदी का इस्तेमाल हथियार के रूप में कर सकता है। हालांकि, चीन भारत और बांग्लादेश को भरोसा दिलाया है कि नदी पर बांध बनाने के बावजूद उनके हिस्से के पानी पर असर नहीं होगा। 

ब्रह्मपुत्र पर एक नजर  - 3848 किलोमीटर लंबी नदी है, तिब्बत में है उद्गम स्थल  - 7.12 लाख वर्ग किलोमीटर का विशाल बेसिन नदी का है  - 19,800 घन मीटर प्रति सेकेंड बहाव है समान्य दिनों में  - 1.84 लाख टन उपजाऊ मिट्टी हर साल क्षेत्र में बिछाती है 


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