भारत की चाल से चीन को आया पसीना, बदलीं नीतियां

नई दिल्ली (2 जनवरी): यूं तो भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा पूरी दुनिया में मशहूर है और भारत कई मामलों में चीन को टक्‍कर भी देता नजर आता है। हालांकि इसके बाद भी चीन यह मानने को तैयार नहीं होता है कि भारत उसे टक्‍कर दे रहा है। भारत के इकोनॉमिक डेवलपमेंट को अमेरिका के अलावा भले ही यूरोपीय देश मान्‍यता देते हों, लेकिन चीन का दावा है कि भारत को चीन के बराबर आने में बहुत टाइम लगेगा। लेकिन इसबार चीन के पसीने छूट रहे हैं।

- भारत की ओर से हाल में 5000 किमी रेंज वाली मिसाइल का टेस्‍ट किए जाने पर चीन बौखलाया ही था और पूरे मामले को यूएन में ले जाने की धमकी दे चुका है।

- अबकी बार भारत ने एक और मामले में चीन को ऐसी पटखनी दी है, कि इससे उसके पसीने छूटे गए हैं।

- रोचक बात यह है कि इसके चलते चीन को अपने नियम बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।  

- दअरसल दुनिया भर के निवेश (एफडीआई) को अपने देश में आकर्षित करने के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है।  

- भारत ने 2015 में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे ज्‍यादा एफडीआई आकर्षित करने वाला देश बन गया था। - इस दौरान जहां भारत ने 63 अरब डॉलर एफडीआई आ‍कर्षित किया था, वहीं चीन के हिस्‍से सिर्फ 56.6 अरब डॉलर ही एफडीआई आया।

भारत से 2 साल से मात खाने के बाद अब चीन को एफडीआई को लेकर अपने नियमों को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। - चीन ने इसके चलते कुछ ऐसे सेक्‍टर को खोलने का फैसला किया है, जिन्‍हें अभी तक विदेशी निवेश के लिए नहीं खोला गया था।

- इसमें परिवहन और रेलवे जैसे सेक्‍टर भी शामिल हैं।

- चीन ने एफडीआई के लिए रेस्टिक्‍टेड सेगमेंट की संख्‍या को 93 से घटाकर अब 62 कर दिया है।