INSIDE STORY: #India के खिलाफ PAK की 'चीनी साजिश', ड्रैगन ने रोका ब्रह्मपुत्र का पानी, जानिए क्या है भारत को खतरा...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर चली है ना'पाक' चाल। ड्रैगन ने रोक दिया ब्रह्मपुत्र का पानी। जी हां चीन ने ब्रह्मपुत्र पर बन रही अपनी सबसे महंगी पनबिजली परियोजना के निर्माण के तहत तिब्बत में ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी शियाबुकू का प्रवाह रोक दिया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से यह खबर सामने आई है। शिन्हुआ में छपी खबर के मुताबिक लाल्हो परियोजना के निर्माण कार्य के चलते पानी को रोकना पड़ा है। लाल्हो परियोजना तिब्बत में ब्रह्मपुत्र पर चीन की सबसे महंगी पनबिजली परियोजना है। इस परियोजना की लागत 4.95 अरब युआन लगभग 5 हजार करोड़ रुपए है। पानी रोके जाने के बाद भारत की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि इससे पूर्वोतर के राज्यों में ब्रह्मपुत्र के जल का प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है। गौरतलब है कि सिंधु नदी का पानी रोकने की खबर से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है, पाकिस्तान भारत को धमकी दे रहा है कि अगर भारत ने सिंधु का पानी रोका तो चीन फिर ब्रह्मपुत्र का पानी रोक देगा। जानिए ब्रह्मपुत्र का पानी रोके जाने से भारत को क्या है खतरा... 

- चीन ने तिब्बत के शिगाजे में यारलुंग झांग्बो (ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) की सहायक नदी शियाबुकू का पानी रोका है। - चीन इस नदी पर लाल्हो परियोजना बना रहा है, जिसकी लागत 4.95 अरब युआन लगभग 5 हजार करोड़ रुपए है। - यह परियोजना जून 2014 में शुरू की गई थी और इसका निर्माण 2019 तक पूरा कर लिया जाना है। - पानी रोके जाने से भारत के पूर्वोतर के राज्यों में ब्रह्मपुत्र के जल का प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है। - चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर कई प्रोजेक्ट चला रखे हैं, जिसमें से एक है लाल्हो परियोजना। - चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर पावर प्रोजेक्ट के नाम पर ब्रह्मपुत्र के जल का प्रवाह को रोकने का काम कर रहा है। - हकीकत में चीन ब्रह्मपुत्र पर डैम बनाकर पानी का भंडारण कर रहा है, जो भविष्य में भारत के लिए खतरनाक है। - ब्रह्मपुत्र पर भारत के एक अंतर-मंत्रालय विशेषज्ञ समूह (आइएमइजी) 2013 में जता चुका है चिंता। - आइएमइजी में कहा था कि ये बांध ऊपरी इलाके में बनाए जा रहे हैं।  - हालांकि चीन कहता रहा है कि ये प्रोजेक्ट रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट हैं जिसमें पानी का भंडारण नहीं होगा। - लेकिन चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ इसकी पोल खुद ही खोलती है। - शिन्हुआ में साफ लिखा है कि ये लाल्हो परियोजना में 295 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी इकठ्ठा किया जा सकता है। - चीन के ये डैम संघर्ष के समय ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि इन डैमों से अचानक पानी छोड़ा जा सकता है।  - जिससे भारत के पूर्वोतर राज्यों समेत बांग्लादेश में बाढ़ आने का गंभीर खतरा होगा। - चीन इससे पहले अक्टूबर 2015 में तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़ा डैम चालू कर चुका है।  - जम हाइड्रो पावर स्टेशन जिसको जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है तिब्बत के ग्यासा काउंटी में है।

तिब्बत में चीन का सबसे बड़ा बांध - 9600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार जांगमू हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट। - 116 मीटर ऊंचा यह बांध अगले साल तक पूरी तरह से तैयार होगा। - 510 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा तिब्बत में बने इस बांध से। - 2010 में शुरू जांगमू प्रोजेक्ट के पांच चरण अगले साल तक पूरे होंगे।

दूसरे देशों को भी ऐतराज - इरतिश व इली नदियों पर चीन के बांध बनाने पर कजाकिस्तान पहले ही जता चुका है विरोध। - मीकांग पर चीनी बांधों से थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, कंबोडिया को आपत्ति। - मीकांग, ब्रह्मपुत्र, यांगत्से और यलो रिवर जैसी बड़ी नदियों का स्नोत तिब्बत।

हिमालय पर बांधों की बाढ़ - 400 बांध प्रस्तावित, हिमालय की विभिन्न नदियों पर इस वक्त चीन, भारत, बांग्लादेश, पाक, भूटान और नेपाल बना रहे बांध। - 100 बड़े बांध बना रहा चीन तिब्बत की 32 में से 28 बड़ी नदियों पर। - 20 सालों में बांधों का सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा हिमालय। - 60 बांध बना रहा चीन दपू. एशिया तक बहने वाली मीकांग नदी पर तिब्बत से चीन के तमाम इलाकों से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बहती है मीकांग। - 129 जल विद्युत प्रोजेक्ट पर काम कर रहे भारत-चीन के पड़ोसी देश। - 292 बांध बना रहा भारत, लेकिन छोटे और निचले इलाकों में स्थित।

ब्रह्मपुत्र पर चीन की नजरें - 27 और बांध बना रहा चीन यारलुंग सांगपो पर(ब्रह्मपुत्र का चीनी नाम)। - 1625 किमी नदी का इलाका चीन में, 918 किमी भारत के इलाके में। - 25 लाख मेगावॉट बिजली पैदा होगी जांगमू बांध से हर एक साल में। - 640 मेगावॉट के एक और बांध पर काम कर रहा चीन(जांगमू से बड़ा)।

ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़े रोचक तथ्य

- एशिया की सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्र 2,906 किलोमीटर लंबी है। - ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत के दक्षिण में मानसरोवर के निकट चेमायुंग दुंग ग्लेशियर से हुआ है - इसे तिब्बत में सांग्पो, अरुणाचल में सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र के मान से जाना जाता है। - असम से यह बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश करती है तिब्बत में इस नदी की लंबाई 1,625 किमी है। - भारत में 918 किमी, बाकी 363 किमी हिस्सा बांग्लादेश में है। - अरुणाचल और असम की आबादी में से लगभग अस्सी फीसदी लोग अपनी आजीविका के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं। - तिब्बत के पठारी इलाके में, यार्लुंग सांगपो नाम से जाना जाता है। - लगभग 4000 मीटर की औसत उचाई पर, 1,625 किमी तक पूर्व की ओर बहती है। - जिसके बाद नामचा बार्वा पर्वत के पास दक्षिण-पश्चिम की दिशा में मुडकर भारत के अरूणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। - उंचाई को तेजी से छोड़ यह मैदानों में दाखिल होती है, जहां इसे दिहांग नाम से जाना जाता है।  - असम में नदी काफी चौड़ी हो जाती है और कहीं-कहीं तो इसकी चौड़ाई 10 किलोमीटर तक है।  - डिब्रूगढ तथा लखिमपुर जिले के बीच नदी दो शाखाओं में विभक्त हो जाती है।  - असम में ही नदी की दोनो शाखाएं मिल कर मजुली द्वीप बनाती है जो दुनिया का सबसे बड़ा नदी-द्वीप है।  - असम में नदी को प्रायः ब्रह्मपुत्र नाम से ही बुलाते हैं, पर बोडो लोग इसे भुल्लम-बुथुर भी कहते हैं जिसका अर्थ है- कल-कल की आवाज निकालना। - यह नदी असम के जनमानस में गहरे रची-बसी है, जाने-माने गीतकार भूपेन हजारिका ने इस लोहित नदी पर ना जाने कितने अमर गीत रचे और गाए है। - असम और अरुणाचल की लोककथाओं में इस नदी का जिक्र होता है।