साल 1967 को याद करे चीन, जब उसने भारत के सामने टेके थे घुटने

नई दिल्ली (3 जुलाई): भारत और चीन के रिश्तों में आ रही खटास के बीच युद्ध की बातें भी होने लगी है। लोग 1962 के युद्ध की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद ही किसी को 1967 वह घटना याद होगी। इस साल भारतीस सैनिकों ने चीनी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सैकड़ों चीनी सैनिकों को ना सिर्फ मार गिराया था, बल्कि उनके कई बंकरों को ध्वस्त कर दिया था।


14,200 फीट पर स्थित नाथु ला दर्रा तिब्बत-सिक्किम सीमा पर है, जिससे होकर पुराना गैंगटोक-यातुंग-ल्हासा व्यापार मार्ग गुजरता है। यूं तो सिक्किम-तिब्बत सीमा निर्धारण स्पष्ट ढंग से किया जा चुका है, पर चीन ने कभी भी सिक्किम को भारत का हिस्सा नहीं माना। 1965 के भारत-पाक युद्घ के दौरान चीन ने भारत को नाथु ला एवं जेलेप ला दर्रे खाली करने को कहा। भारत के 17 माउंटेन डिविजन ने जेलेप ला को तो खाली कर दिया, लेकिन नाथु ला पर भारत का आधिपत्य जारी रहा।


नाथू ला दोनों देशों के बीच टकराव का बिंदु बन गया। 1967 के टकराव के दौरान भारत की 2 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जिम्मे नाथु ला की सुरक्षा थी। इस बटालियन की कमान तब ल़े कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) राय सिंह के हाथों में थी। इस बटालियन की कमान तब ब्रिगेडियर एम़एम़एस़ बक्शी, एमवीसी, की कमान वाले माउंटेन बिग्रेड के अधीन थी।

भारतीय सेना के एक सूत्र के मुताबिक नाथु ला दर्रे पर सैन्य गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच अक्सर जुबानी जंग का माहौल बना रहता था, जो शीघ्र ही धक्कामुक्की में तब्दील हो गया।


धक्कामुक्की की एक घटना का संज्ञान लेते हुए भारतीय सेना ने तनाव दूर करने के लिए नाथु ला से लेकर सेबू ला तक के दर्रे के बीच में तार बिछाने का फैसला किया। यह जिम्मा 70 फील्ड कंपनी ऑफ इंजीनियर्स एवं 18 राजपूत की एक टुकड़ी को सौंपा गया। जब बाड़बंदी शुरू हुई तो चीन के पॉलिटिकल कमीसार ने राय सिंह से फौरन यह काम रोकने को कहा। दोनों ओर से कहासुनी शुरू हुई और चीनी अधिकारी के साथ धक्कामुक्की से तनाव बढ़ गया। चीनी सैनिक तुरंत अपने बंकर में लौट गए और भारतीय इंजीनियरों ने तार डालना जारी रखा।


चंद मिनटों के अंदर चीनी सीमा से ह्न्सिल की तेज आवाज आने लगी और फिर चीनियों ने मेडियम मशीन गनों से गोलियां बरसानी शुरू कीं। भारतीय सैनिकों को शुरू में भारी नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि उन्हें चीन से ऐसे कदम का अंदेशा नहीं था। राय सिंह खुद जख्मी हो गए, वहीं दो जांबाज अधिकारियों 2 ग्रेनेडियर्स के कैप्टन डागर एवं 18 राजपूत के मेजर हरभजन सिंह के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों के एक छोटे दल ने चीनी सैनिकों का मुकाबला करने की भरपूर कोशिश की और इस प्रयास में दोनों अधिकारी शहीद हो गए।


प्रथम 10 मिनट के अंदर करीब 70 सैनिक मारे जा चुके थे और कई घायल हुए। इसके बाद भारत की ओर से जो जवाबी हमला हुआ, उसने चीन का इरादा चकनाचूर कर दिया। सेबू ला एवं कैमल्स बैक से अपनी मजबूत रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत ने जमकर आर्टिलरी पावर का प्रदर्शन किया। कई चीनी बंकर ध्वस्त हो गए और खुद चीनी आकलन के अनुसार भारतीय सैनिकों के हाथों उनके 400 से अधिक सैनिक मारे गए। भारत की ओर से लगातार तीन दिनों तक दिन-रात फायरिंग जारी रही। चीन को सबक सिखाया जा चुका था।