भारत के खिलाफ लड़ने वाले सैनिक की गुहार, अब तो देदो वतन वापसी का वीजा

नई दिल्ली ( 6 फरवरी ): आज से ठीक करीब 54 साल पहले एक चीनी सैनिक की एक चूक ने उसकी जिंदगी का पूरा अध्याय ही बदलकर रख दिया। परिवार छूट गया, घरबार छूट गया यहां तक कि उसका देश भी छूट गया। युद्ध विराम के बाद चीन का एक सैनिक वांग गलती से भारतीय सीमा लांघ गया था।

चीनी दूतावास के एक प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध के खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय सीमा में घुसते हुए पकडे गये और रिहाई के बाद मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बस गए चीन के सैनिक वांग की (77) से आज मुलाकात की। वांग लंबे वक्त से स्वदेश की यात्रा करने चाहते हैं। उनके बेटे विष्णु वान (35) ने न्यूज24 को बताया ‘‘भारत में स्थित चीन के दूतावास के तीन अधिकारियों ने मेरे पिता से मुलाकात की और एक घंटे से अधिक समय उनसे बातें कीं। अब उनका परिवार भी चाहता है कि उनके पिता को स्वदेश यात्रा के लिए वीजा दिया जाए।  

पत्नी और तीन बच्चों के साथ बालाघाट जिले के तिरोड़ी क्षेत्र में रहने वाले वांग के परिवार के अनुसार, वह भारत सरकार की अनुमति के अभाव के कारण बीते पांच दशक से चीन की यात्रा नहीं कर पाए हैं। विष्णु ने बताया, ‘‘मेरे पिता वर्ष 1960 में चीन की सेना में शामिल हुए थे और वह एक रात अंधेरे में अपना रास्ता भटककर पूर्वी सीमांत होते हुए भारत में घुसे थे।

वांग के पुत्र विष्णु वांग (35) ने ‘ बताया कि चीन की सेना में सन 1960 में उसके पिता बतौर सैनिक शामिल हुए थे। यसन 1962 में चीन की सेना ने भारत पर हमला कर दिया। युद्घ विराम की घोषणा होने के बाद कथित तौर पर रास्ता भटक कर वांग भारत की सीमा के इतने अंदर आ गया और उसकी सैन्य टुकडी बहुत पीछ रह गयी। विष्णु के अनुसार, उसके पिता को एक जनवरी 1963 को असम छावनी में गिरफ्तार किया गया। युद्घ के दौरान घायल हुए वांग का रेडक्रॉस के शिविर में उपचार हुआ और हालत में सुधार होने के बाद उसे सेना के हवाले कर दिया।

भारत ने वांग को चीनी जासूस समझा, उससे बार-बार पूछ्ताछ हुई और अंतत: सात वर्ष कारावास की सजा के बाद उसे रिहा कर दिया गया। वर्ष 1963 से 1969 तक वांग पंजाब की नाभा जेल और अजमेर की जेलों में सजा काटते रहा। वर्ष 1969 में चंडीगढ उच्च न्यायालय ने उसे रिहा किया। इसके बाद उसके पुनर्वास के नाम पर उन्हें लावरिशों की तरह बालाघाट के तिरोड़ी कस्बे में छोड़ दिया गया। जहां 1974 में वांग ने सुशीला से विवाह रचाया और जीविका के लिए एक किराने की दुकान खोली। आज वांग की 2 बेटियां और एक बेटा है। सभी की शादी हो चुकी है और वांग के अच्छे व्यवहार का हर कोई कायल है।

वांग यहां काफी मुश्किलों में रहे और अब अपने वतन जाकर अपने लोगों से मिलना चाहते हैं इसलिये लिये उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विदेश मंत्री

सुषमा स्वराज से भी गुहार लगाई है।