इस देश में इतनी बिजली कि बांटनी पड़ रही है मुफ्त

नई दिल्ली (4 जून) :  दुनिया में एक देश ऐसा भी है जहां बिजली मुफ्त में बांटनी पड़ रही है। इस देश का नाम है चिली। चिली में सोलर इंडस्ट्री के अत्यधिक विकास की वजह से ऐसा हो रहा है।

हालांकि उपभोक्ताओं के लिए ये अच्छी ख़बर हो सकती है लेकिन कंपनियों के लिए बुरी ख़बर है। अपने प्लांट वाली इन कंपनियों के सामने राजस्व के टोटे के चलते अस्तित्व का सवाल खड़ा हो गया है।

'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक चिली में 29 सोलर फार्म्स सेंट्रल ग्रिड को पावर सप्लाई कर रहे हैं। ऐसे ही 15 फार्म और प्रस्तावित हैं। चिली में खनन उत्पादन को देखते हुए ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। लेकिन सोलर फार्म इस मांग से कहीं अधिक ऊर्जा उत्पादन करने में सक्षम हैं।

चिली के सुदूर उत्तर को खनन उद्योग का केंद्र माना जाता है। यहां नए सोलर फार्म बनाए जा रहे हैं। यहां तांबे के खनन के कम होने की वजह से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त हुई है। वैश्विक मंदी का भी असर पड़ा है। इस वजह से ऊर्जा के दाम कम हुए हैं। पावर प्लांट्स क्षेत्र में ओवरसप्लाई कर रहे हैं। दरअसल ट्रांसमिशन्स लाइन्स की कमी की वजह से इन्हें पावर को अन्यत्र वितरित करना पड़ रहा है।

एसीओना एसए एनर्जी यूनिट के सीईओ राफेल माटेओ ने बताया कि निवेशकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लैटिन अमेरिका क्षेत्र में सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक 247 मेगापावर के प्लांट पर 34 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया है। राफेल के मुताबिक विकास अनियंत्रित है। आप एक ही समय में एक ही जगह पर इतने सारे डेवेलपर्स नहीं खड़े कर सकते।

चिली के सेंट्रल पावर ग्रिड (एसआईसी) में 2013 से अब तक पावर उत्पादन चौगुना होकर 770 मेगावॉट हो चुका है। अधिकतर पावर ग्रिड के उत्तरी हिस्सों से आ रही है। इस क्षेत्र को अटाकामा कहा जाता  है जहां कॉपर इंडस्ट्री का केंद्र है। एसआईसी की ओर से रिहाईश क्षेत्रों में बिजली की 90 फीसदी मांग को पूरा किया जाता है।