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झारखंड: नक्सलियों की दहशत की वजह से स्कूली बच्चे साथ ले जाते हैं तीर-कमान

झारखंड के चकुलिया स्थित पोचपनी में स्कूली बच्चे हाथों में तीर और कमान लेकर स्कूल जाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि स्कूल में तीर कमान का क्या काम है। तो आपको बता दें कि स्कूल में तीर कमान लेकर जाने की वजह है क्षेत्र में पसरी नक्सलियों की दहशत। क्षेत्र में नक्सलियों की वजह से दहशत उतनी फैली हुई है कि बच्चे खुद को महफूज रखने के लिए यह कदम उठाने को मजबूर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्व शिक्षा अभि

                                                                                                                  Image Source: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 नवंबर): झारखंड के चकुलिया स्थित पोचपनी में स्कूली बच्चे हाथों में तीर और कमान लेकर स्कूल जाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि स्कूल में तीर कमान का क्या काम है। तो आपको बता दें कि स्कूल में तीर कमान लेकर जाने की वजह है क्षेत्र में पसरी नक्सलियों की दहशत। क्षेत्र में नक्सलियों की वजह से दहशत उतनी फैली हुई है कि बच्चे खुद को महफूज रखने के लिए यह कदम उठाने को मजबूर हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्व शिक्षा अभियान की राह में झारखंड में नक्सलियों ने रोड़े पैदा कर दिए हैं। नक्सलियों के आतंक की वजह से स्कूली बच्चे स्कूल जाते समय अपनी सुरक्षा के लिए तीर-कमान लेकर जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है, 'बच्चे जंगल के क्षेत्र से गुजरते हैं, जहां पर उन्होंने कई बार बड़ी संख्या में नक्सलियों को देखा है।गौरतलब है कि पिछले महीने ही झारखंड के गिरिडीह जिले में मंगलवार को नक्सलियों ने रेल की पटरी को विस्फोट कर उड़ा दिया था। इससे ग्रैंड चॉर्ड धनबाद डिवीजन पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई। बता दें कि पाकुड़ जिले के एसपी अमरजीत बलिहार और उनके पांच अंगरक्षकों की हत्या के आरोप में दो नक्सलियों इसी साल 26 सितंबर को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके विरोध में नक्सलियों ने रेल की पटरी उड़ाई थी। 

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