3 दिन से भूखे थे बच्चे, किसान ने की खुदकुशी

अक्षय द्विवेदी, बांदा (22 अप्रैल): सूखे की मार झेल रही बुंदेलखंड की बंजर धरती से अन्न पैदा नहीं हो रहा। गरीबी, बेबसी और कर्ज से परेशान सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। एक बार फिर बांदा के एक किसान ने मौत को गले लगा लिया, उसके बच्चे तीन दिन से भूखे थे।

दाने-दाने को मोहताज बांदा के किसान बबली ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी और पीछे छोड़ गया भूख से बिलखते मासूम बच्चों को जिन्हें कई दिनों से अन्न का एक दाना तक नसीब नहीं हुआ है। बबली बांदा जिले के गांव जमुनिहा पुरवा का रहने वाला था। सूखे की मार झेल रहा यह किसान अपने बच्चों की भूख मिटाने की जुगाड़ में इतना बेबस हो गया कि आखिरकार उसने मौत को गले लगा लिया।

बबली ने गांव के लल्लू सिंह से 7 मन अनाज देने के ठेके पर 2 बीघा खेत लिया था। कर्ज लेकर फसल बोई, सालभर खून-पसीना बहाने के बाद खेत में 8 मन गेंहू पैदा हुआ। 1 मन गेहूं कटाई करने वाले मजदूर को दिया और बाकी के 7 मन, खेत मालिक के हिस्से गया। अब बबली के पास क्या बचा, वो खुद क्या खाता। भूख और बेबसी की जिंदगी जी रहे अपने बच्चों को क्या खिलाता। घर में अनाज का एक दाना नहीं बचा।

न्यूज़ 24 की टीम जब मृतक के घर पहुंची तो घर के हालात ने अंदर तक हिला कर रख दिया। मृतक के बच्चे तीन दिन की बासी सूखी रोटी खा रहे थे। बबली की मौत पर जब परिवार को मुआवजे का मरहम लगाने सरकारी बाबू पहुंचे तो 50 किलो अनाज देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

वीडियो:

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