यूपी के 'लाल' ने मध्यप्रदेश में किया कमाल

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 दिसंबर): कमलनाथ आज मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। 15 साल के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस को जीत मिली है ऐसे में कांग्रेस ने शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की हर मुमकीन तैयारी में जुटी है। भोपाल के जम्बूरी मैदान में कमलनाथ की ताजपोशी की तैयारी जोरों पर है। यहां तक कि भोपाल से 2019 लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन की झलक भी दिखायी जाएगी और इसलिए राहुल गांधी, तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। पूरे प्रदेश से इसमे करीब 1 लाख कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है।

कमलनाथ के बारें सबकुछ...

शिवराज सिंह चौहान के विपरीत कमलनाथ को एक समृद्ध राजनेता के तौर पर देखा जाता है। कमलनाथ का जन्म कानपुर में हुआ और वह कोलकाता में पले-बढ़े हैं। उनकी पढ़ाई दून स्कूल से हुई है। वह कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक हैं। कमलनाथ पहली बार 1980 में लोकसभा सांसद चुने गए थे। उसके बाद 1985, 1989, 1991 तक लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे।

1995 से 1996 के बीच वह केंद्रीय मंत्री रहे। इसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में तीसरी लोकसभा के लिए चुने गए। 2001 से 2004 तक वह कांग्रेस के जनरल सेक्रटरी रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा चुने गए और 2004 से 2009 तक कैबिनेट मिनिस्टर रहे। 2009 में एक बार से वह लोकसभा पहुंचे और कैबिनेट में शामिल हुए। 2012 में उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला। 

छिंदवाड़ा लोकसभा से 9 बार सांसद रह चुके कमलनाथ ने राज्य में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई है। वह पिछले कई दशकों से राज्य में जमीन स्तर पर काम कर रहे हैं और यहां उनका मजबूत जनाधार भी है।कमलनाथ गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के करीब रहे हैं। छिंदवाड़ा के लोगों के सामने कमलनाथ का परिचय कराते हुए इंदिरा गांधी ने कहा था- 'ये मेरे तीसरे बेटे हैं, इन्हें वोट दीजिएगा।' बाद में 'इंदिरा के दो हाथ, संजय गांधी और कमलनाथ' का नारा भी खूब गूंजा। कमलनाथ ना केवल संजय गांधी के करीबी दोस्त रहे बल्कि राजीव गांधी के भी भरोसेमंद सिपाही रहे। पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कमलनाथ की स्वीकार्यता और अपनी चुनावी रणनीति में कुशलता की वजह से यूपीए-2 सरकार में सोनिया गांधी के भी विश्वासपात्र बन गए। 

कमलनाथ द इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नॉलजी ए मैनेजमेंट इंस्टीट्यूशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष रहे हैं। सितंबर 2011 में कमलनाथ को सबसे धनी केंद्रीय मंत्री घोषित हुए। उनके पास 2.73 बिलियन यानी दो अरब 73 करोड़ रुपये की संपत्ति रही। पीपीपी मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, वर्ल्ड मार्केट को लेकर गहरी जानकारी रखते हैं। 2011 में दवोस में हुई वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम में कमलनाथ अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं।