जानिए कौन हैं भूपेश बघेल, जिन्हें कांग्रेस ने बनाया है छत्तीसगढ़ का सीएम


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 दिसंबर): छत्तीसगढ़ में आज कांग्रेस का 15 साल का वनवास खत्म होने जा रहा है। आज से छत्तीगढ़ में कांग्रेस का राज होगा और छत्तीसगढ़ की कमान भूपेश बघेल के हाथों में होगी। भूपेश बघेल आज शाम 4 बजे छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। भूपेश बघेल रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले रविवार को रायपुर में कांग्रेस विधायक दल ने भूपेश बघेल को अपना नेता चुना। नेता चुने जाने के बाद भूपेश बघेल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और विधायकों के प्रति अपना आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के घोषणा पत्र पूरा करना मेरी प्राथमिकता है। बघेल ने कहा कि वादे के मुताबिक 10 दिन के भीतर कर्जा माफ होगा।



फिलहाल भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। 2019 में होने वाले आम चुनाव और संगठन पर मजबूत पकड़ के चलते कांग्रेस ने भूपेश बघेल का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए फाइनल किया। रमन सिंह सरकार के खिलाफ हमेशा बिगुल फूंकते रहे। इसके चलते कई बार मुकदमों में भी फंसे, मगर डिगे नहीं। कुर्मियों में इनका अच्छा जनाधार माना जाता है। मुख्यमंत्री चयन में कुर्मी जनाधार भी इनके लिए प्लस प्वाइंट रहा।



80 के दशक में जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था, तब भूपेश बघेल ने राजनीति की पारी यूथ कांग्रेस के साथ शुरू की थी। दुर्ग जिले के रहने वाले भूपेश दुर्ग के यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1994-95 में भूपेश बघेल को मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया। 1993 में जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो भूपेश कांग्रेस से दुर्ग की पाटन सीट से उम्मीदवार बने और जीत दर्ज की। इसके बाद अगला चुनाव भी वो पाटन से ही जीते। जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार बनी, तो भूपेश कैबिनेट मंत्री बने। 2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया और पाटन छत्तीसगढ़ का हिस्सा बना, तो भूपेश छ्त्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे। वहां भी वो कैबिनेट मंत्री बने। 2003 में कांग्रेस जब सत्ता से बाहर हो गई, तो भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया। 2004 में जब लोकसभा के चुनाव होने थे, तो भूपेश को दुर्ग से उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन बीजेपी के ताराचंद साहू ने उन्हें करीब 65 हजार वोटों से मात दे दी। 2009 में कांग्रेस ने उनकी सीट बदली और वो रायपुर से चुनाव लड़े। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अक्टूबर 2014 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और तब से वो इस पद पर हैं।