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ऐसे करें अराधना, छठी मैया पूरी करेंगी हर मनोकामना

भगवान भास्कर के आस्था के पर्व छठ की बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में तैयारियां जोरों पर है। इसके तहत तमाम जगहों पर नदी और तालाबों के किनारे घाटों की सफाई समेत तमाम कार्य जोर शोर से किए जा रहे हैं।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 नवंबर): भगवान भास्कर के आस्था के पर्व छठ की बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में तैयारियां जोरों पर है। इसके तहत तमाम जगहों पर नदी और तालाबों के किनारे घाटों की सफाई समेत तमाम कार्य जोर शोर से किए जा रहे हैं। चार दिनों तक चलने वाले आस्था के महालोकपर्व छठ का आज दूसरा दिन है। कल जहां नहाय खाय था वहीं आज खरना है। कल यानी 13 नवंबर को डुबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा वही परसों यानी 14 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस माहपर्व का समापन होगा। इस पर्व की महत्ता का अंजादा इसी बात से लगाई जा सकती है कि बड़े से बड़े रसूखदार लोग भी नदी या फिर तालाब के किनारे खुले आसमान में रहकर भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देते हैं, सूर्य मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं।

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मान्यता के मुताबिक छठ के दौरान सच्चे मन से नदी या तालाब में स्नान कर सूर्य की उपासना करने से निश्चित ही कल्याण होता है। इस दौरान भगवान सूर्य को चढ़ाने के लिए खास पकवान बनाने की परंपरा है। इस दौरान उपासक मैदे से बने ठेकुआ, पूड़ी, गुंजिए जैसे पकवानों को बनाते हैं। इन पकवानों का उपयोग सूर्य को अध्र्य देने के दौरान उपयोग किया जाता है। इन पकवानों को बनाने का सिलसिला व्रत के दिन से शुरू हो जाता है। मान्यता है कि पकवान बनाते समय किसी भी प्रकार की अशुद्धता होने पर व्रत को खंडित माना जाता है। ऐसी स्थिति में उपासक अन्य व्रतधारियों से अर्पित होने वाले पकवानों को मांग कर चढ़ाते है।

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छठ पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि....13 नवंबर 2018, मंगलवार के दिन षष्ठी तिथि का आरंभ 1.50 मिनट पर होगा और इसका समापन 14 नवंबर 2018, बुधवार के दिन 4.21 बजे होगापहला दिन नहाय-खाए- कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को यह व्रत आरंभ होता है। इसी दिन व्रती स्नान कर नए वस्त्र धारण करता है। यह रविवार 11 नवंबर को पड़ रहा हैदूसरा दिन खरना- कार्तिक शुक्ल की पंचमी को खरना मनाया जाता है। इस दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती भोजन करता है। यह सोमवार 12 नवंबर को पड़ रहा हैतीसरा दिन सांध्या अर्घ्य- इस दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद तथा फल की टोकरी सजा कर व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाते हैं और स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा करते हैं. यह तिथि मंगलवार 13नवंबर को हैचौथा दिन प्रात:कालीन अर्घ्य- सप्तमी को प्रातः सूर्योदय के समय विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करते हैं। यह तिथि बुधवार 14 नवंबर को है।

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