कमाल: दोनों हाथों से करता है गेंदबाजी, मिली टीम में जगह

नई दिल्ली(27 फरवरी): ऑस्ट्रेलिया की अंडर 16 टीम में एक ऐसा स्पिनर शामिल हुआ है जो बाकियों से काफी अलग है। इस स्पिनर की खासियत यह है कि वह दोनों हाथों से गेंदबाजी कर सकता है। 15 साल के निवेतन राधाकृष्णन को आने वाले सीजन के लिए अंडर-16 टीम में शामिल किया है।

निवेतन के पिता अंबु सेलवन तमिलनाडु के लिए जूनियर स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं। वह 2013 में अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो गए। तब से लेकर अब तक निवेतन सिडनी में न्यू साउथ वेल्स की जूनियर क्रिकेट टीम में खेल चुके हैं। 

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं भविष्य में मौकों की तलाश में रहूंगा और उनमें अच्छा प्रदर्शन करना मेरी कोशिश रहेगी। पिछले साल, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज रेयान हैरिस अंडर-16 टीम के कोच थे। ग्रेग चैपल चूंकि टीम का संचालन कर रहे हैं, मुझे लगता है कि जल्द ही कोई स्टार क्रिकेटर टीम का कोच बनेगा। मैं इसे लेकर काफी उत्साहित हूं।' 

निवेतन की एक खूबी उन्हें अपनी उम्र के बाकी खिलाड़ियों से अलग खड़ा करती है। जब वह छह साल के थे, निवेतन ने पहले बाएं हाथ से स्पिन फेंकी और इसके बाद दाहिने हाथ से ऑफ स्पिन फेंकने की कोशिश की। जरूरत पड़ने पर वह दाएं हाथ से मध्यम-तेज गति से गेंदबाजी कर सकते हैं। वह बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज भी हैं। 

अपनी इस खूबी के बारे में उन्होंने कहा, 'यह एक बड़ा फायदा है। हम आमतौर पर दो दिन का ग्रेड गेम खेलते हैं। गर्मियों में स्पिनर्स को काफी गेंदबाजी करनी होती है। अब जबकि मैं दोंनों हाथों से गेंदबाजी कर सकता हूं, मेरे क्लब को इससे काफी फायदा होता है। मेरी इस खूबी से टीम में एक हद तक संतुलन भी आता है।' 

पहली बार निवेतन की चर्चा तब हुई जब उन्होंने आठ साल की उम्र में चेन्नै में खेले गए टीएनसीए के लोअर डिविजन लीग मैच में हैट-ट्रिक ली थी। 

निवेतन सिडनी के होमबुश हाई स्कूल में 10वीं के छात्र हैं। वह आने वाली नैशनल चैंपियनशिप में ऑस्ट्रेलिया अंडर-16 टीम का हिस्सा होंगे और उनका सामना ऑस्ट्रेलिया अंडर-17 से होगा। वह इसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्लान के तहत दुबई भी जाएंगे। 

तमिलनाडु प्रीमियर लीग के पिछले सीजन में खेलने वाले निवेतन कहते हैं, 'भारत और यहां के क्रिकेट में काफी फर्क है। ऑस्ट्रेलिया में मेरी उम्र के लड़के नि:संदेह भारत के लड़कों से ज्यादा मजबूत हैं। हालांकि अगर रणनीतिक रूप से भारतीय आगे होते हैं। भारत में अकैडमी स्तर के मैचों में कोच कप्तान को फील्ड प्लेसमेंट को लेकर सलाह देते हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में ऐसा नहीं होता। मैच के दौरान कोच दखल नहीं देते। वे केवल ब्रेक्स के दौरान बात करते हैं। ' 

निवेतन ने कहा, 'मुझे सचिन की तकनीक, कोहली की आक्रमकता, स्टीव स्मिथ का गेम प्लान, शाकिब-अल-हसन की आर्म बॉल और नेथन लॉयन की ऑफ स्पिन पसंद है। लेकिन मैं सर गैरी सोबर्स जैसा बनना चाहता हूं। मैं उनके जैसा संपूर्ण ऑलराउंडर बनना चाहता हूं।' 

निवेतन को हालांकि उनके पिता अंबु कोचिंग देते हैं लेकिन पिछले साल न्यू साउथ वेल्स अकादमी में बतौर सलाहकार आए लॉयन की सलाह से काफी फायदा मिला। उन्होंने निवेतन को काफी तकनीकी सलाह दी। 

उन्होंने कहा, 'मैंने आज तक सिर्फ एक शीर्ष ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर से बात की है और वह लॉयन। उनके टिप्स ने मुझे बेहतर गेंदबाज बनने में मदद की। उन्होंने मुझे ऐक्शन बदलने की सलाह दी। उसका मुझे फायदा मिला। सपाट विकेटों पर भी अब मेरी गेंदों में अधिक टर्न और स्पिन होता है।'