बच्चा खान यूनिवर्सिटी हमला: छात्रों को बचाने की कोशिश में कैमिस्ट्री टीचर 'शहीद'

नई दिल्ली (20 जनवरी): पाकिस्तान की बच्चा खान युनिवर्सिटी में बुधवार को हुए घातक तालिबानी हमले में बच्चों को बचाने की कोशिश में एक कैमिस्ट्री टीचर की मौत हो गई। इस बेहद साहसिक कार्य के दौरान मारे गए इस टीचर का अब 'शहीद' और 'सज्जन आदमी' के तौर पर गुणगान किया जा रहा है।

पाकिस्तानी अखबार 'द डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, चारसद्दा की बच्चा खान यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसरस लेक्चरर सईद हामिद हुसैन ने गोलीबारी शुरू होने पर छात्रों को अंदर रहने का आदेश दिया। यह यूनिवर्सिटी पेशावर शहर के पास ही स्थित है। बुधवार को हुए इस हमले में करीब 21 लोग मारे गए।

छात्रों ने बताया कि किस तरह उसने बंदूकधारियों पर बदले में गोलीबारी की। हमलावर पूरे कैम्पस में उपद्रव मचा रहे थे। लेक्चरर सईद ने गोलियों से भूने जाने तक नौजवानों को निकल जाने का पूरा मौका दिया। एक शख्स ने पत्रकारों को बताया, ''हमने तीन आतंकियों को चिल्लाते हुए सुना...। इसके बाद वे हमारे डिपार्टमेंट की तरफ दौड़े। एक छात्र विंडो से क्लासरूम के बाहर कूदा। हमने उसे फिर उठते हुए नहीं देखा।'' शख्स ने सईद को पिस्तौल से हमलावरों पर गोलीबारी करते हुए आंखो देखा हाल बताया। 

''तभी हमने देखा कि वह गिर गया और आतंकी रजिस्ट्रार ऑफिस में घुसे हैं, हम भाग गए।'' जियोलॉजी के छात्र जहूर अहमद ने बताया, सईद ने पहली बार गोलियों की आवाज सुनने के बाद हमें बिल्डिंग ना छोड़ने की चेतावनी दी। उसने बताया, ''वह अपने हाथ में एक पिस्तौल पकड़े हुए थे। तभी मैंने देखा उन्हें एक गोली लगी। मैंने देखा दो आतंकी गोली चला रहे थे। मैं भीतर भागा, और बाद में पीछे की दीवार से कूदकर भागने में कामयाब हो गया।''

सोशियॉलॉजी के छात्र मोहम्मद दाउद ने सईद को एक ''सच्चा सज्जन आदमी और आदरणीय अध्यापक'' कहते हुए बताया, ''उन्होंने सीधे प्रोफेसर पर गोली चला दी।'' मृत टीचर के लिए ट्विटर पर श्रृद्धांजलि दी जा रही है। पत्रकार और अकादमिक रजा अहमद रूमी ने ट्वीट कर कहा, ''शिक्षा का शहीद: प्रोफेसर हामिद जो बच्चा खान यूनिवर्सिटी, पाकिस्तान में आतंकियों के हाथों मारे गए।''

राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने लेक्चरर की मौत की पुष्टि की, साथ ही दुख व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार को ढांढस बंधाया। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि स्कूल में हुआ खूनखराबा कई घंटों के बाद बंद हुआ। पुलिस के मुताबिक, करीब 21 लोग मारे गए। मिलिट्री का कहना है कि चारे चरमपंथियों की हत्या की गई है। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि उनकी संख्या भी कुल मौतों में शामिल है या नहीं। तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। 

गौरतलब है, साल 2014 में पेशावर के स्कूल में हुए तालिबानी हमले के बाद खैबर पख्तुन्ख्वा में टीचर्स को क्लासरूम्स में हथियार ले जाने की मंजूरी दे दी गई थी। इस भयानक हमले में 150 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर बच्चे ही थे।