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क्यों सस्ते स्मार्टफोन्स बन रहे हैं परेशानी का सबब?

आपने अक्सर देखा होगा कि कई मोबाईल कंपनी आपको सस्ते दामों में स्मार्टफोन देने की बात करती हैं। और लोग उन पर भरोसा करके मोबाईल खरीद भी लेते हैं।

नई दिल्ली (25 जून): आपने अक्सर देखा होगा कि कई मोबाईल कंपनी आपको सस्ते दामों में स्मार्टफोन देने की बात करती हैं। और लोग उन पर भरोसा करके मोबाईल खरीद भी लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।आपको बता दें कि अवास्ट थ्रेट लैब्स ने कॉजिलून नामक ऐडवेअर की पहचान की है जो मायफोन, आर्कोस और जेडटीई जैसी कंपनियों के ऐंड्रॉयड डिवाइस में पहले से ही इंस्टॉल रहता है। इतना ही नहीं यह ऐडवेअर यूजर्स के ब्राउजर में वेबपेज पर एक ऐड या स्क्रीन पर एक ओवरले बना देता है। इनमें से ज्यादातर डिवाइस गूगल द्वारा प्रमाणित नहीं होते हैं।और आप समझ सकते हैं कि गुगल के द्वारा प्रमाणित न होंने की वजह से ये आपको कितनी बढ़ी परेशानी में डाल सकता है। इसका शायद आपको अंदाजा भी नहीं होगा। आपको बता दें कि ये डिवाइसेज रूस, इटली, जर्मनी, भारत, यूके और अमेरिका सहित 100 से भी अधिक देशों में मौजूद हैं।अवास्ट थ्रेट लैब्स के मुताबिक, ऐडवेअर कम से कम तीन सालों से सक्रिय रहे हैं। इन ऐडवेअर को हटाना काफी मुश्किल होता है क्योंकि ये फर्मवेअर के स्तर पर इंस्टॉल होते हैं और काफी अच्छे से छिपे हुए होते हैं। आप जब भी कोई स्मार्टफोन खरीदने के लिए जाते हैं तो बिना जानकारी के किसी भी प्रकार के मोबाइल को न खरीदें। नहीं तो ये आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।  

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