चारधाम यात्रा: अलर्ट पर भारी आस्था, 17 दिनों में भक्तों की संख्या ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

नई दिल्ली (2 जून): कहते हैं भक्ति में शक्ति होती है इसी भक्ति की शक्ति को अगर आप खुद महसूस करना चाहते हैं तो चले आइये हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा पर। जहां खतरे के अलर्ट के बाद भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बद्रीनाथ धाम में भक्तों के जयकारों का बोलबाला है। केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। गंगोत्री में भी आस्था की गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। तो यमुनोत्री में तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

चारधाम यात्रा ने महज 17 दिनों के भीतर ही भक्तों की संख्या के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चाहे बद्रीनाथ धाम हो या केदारनाथ धाम। लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसा तब है जब उत्तराखंड में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है। 15 दिनों अलर्ट पर भारी आस्था के भीतर प्रदेश में बादल फटने की 8 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन अलर्ट के बाद भी तीर्थ यात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। रोजाना लाखों की तादाद में श्रद्धालु यहां खिंचे चले आ रहे हैं।

बद्रीनाथ धाम आने वाले यात्रियों की तादाद का आलम क्या है। इसका अंदाजा इन तस्वीरों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। जहां हाइवे पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई है।

आंकड़ों पर गौर करें तो.... > 17 दिनों के भीतर बद्रीनाथ धाम में 2 लाख 37 हजार 480 यात्री। > केदारनाथ धाम में 1  लाख 51 हजार 115 यात्री। > गंगोत्री पर 1 लाख, 52 हजार 5 यात्री। > यमुनोत्री पर 1 लाख, 2 हजार 120 यात्री। > सिक्खों के तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए अब तक 20 हजार लोग उत्तराखंड़ पहुंच चुके हैं।

इनमें देसी श्रद्धालुओं के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। लाखों की भीड़ को देखते हुए बद्रीनाथ मंदिर समिति ने अपने टाइम में भी बदलाव किया है। तीर्थ यात्रियों की भीड़ को देखते हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट रात 11 बजे तक खोले जा रहे हैं। प्रशासन भी दावा कर रहा है कि यात्रा में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आ रही।

2013 की तबाही के बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि यहां फिर से ये तस्वीर देखने को मिलेगी। लेकिन कहते हैं भक्ति में शक्ति होती है और उसी शक्ति के सहारे इंसान अपने आराध्य तक खिंचा चला आता है। यही वजह है कि खतरे के बीच भी श्रद्धालु अपनी जान जोखिम में डालकर भगवान के दर पर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।