अंतरिक्ष में भारत को मिली एक और कामयाबी, चांद की कक्षा में स्थापित हुआ चंद्रयान- 2, 11 बजेइसरो प्रमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे

chandrayaan-2

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 अगस्त): अंतरिक्ष में भारत को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में सफलता पूर्वक स्थापित हो गया है। इस सिलसिले में इसरो प्रमुख  डॉ. के. सिवन 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इसकी जानकारी देंगे। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद यान 13 दिन तक चक्कर लगाएगा। 4 दिन बाद यानी संभवत: 7 सितंबर को वह चांद की सतह पर पहले से निर्धारित जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग इसरो के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां हवा नहीं चलती और गुरुत्वाकर्षण बल भी हर जगह अलग-अलग होता है।

chandrayaan-2

22 जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च होने के बाद से ही अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में ही घूम रहा था। दरअसल यह एक-एक कर और ऊंची कक्षा में प्रवेश करने की श्रृंखला का हिस्सा था। इसके तहत अंतरिक्ष यान ने 23 जुलाई से 6 अगस्त कर धरती की कक्षा में कुल जमा पांच बार अपने से आगे वाली कक्षा प्रवेश किया और आगे बढ़ा।  इस सप्ताह के के अंत तक चंद्रयान ने धरती की कक्षा को छोड़ने से पहले सफलतापूर्वक अंतिम रूप से आखिरी कक्षा में चक्कर पूरा कर लिया। यहां तक कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान इसरो तो अगस्त महीने की शुरूआत में चंद्रयान के माध्यम से ली गई धरती की तस्वीरें तक जारी कर चुका है।

chandrayaan-2

चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 की मदद से प्रक्षेपित किया गया था। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं- ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान'। ऑर्बिटर करीब सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए प्रयोगों को अंजाम देगा। वहीं लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे। लैंडिंग के साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक अमेरिका, रूस और चीन अपना यान चांद पर उतार चुके हैं। चंद्रयान-2 के लैंडर-रोवर चांद के जिस हिस्से पर उतरेंगे, वहां अब तक कोई यान नहीं पहुंचा है। 2008 में भारत ने आर्बिटर मिशन चंद्रयान-1 भेजा था। यान ने करीब 10 महीने चांद की परिक्रमा करते हुए प्रयोगों को अंजाम दिया था। चांद पर पानी की खोज का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

(Image Source: Google)