मिशन चंद्रयान-2: 'चंद्रमा की सतह पर 14 दिन तक रहेगा रोवर'

नई दिल्ली ( 5 फरवरी ): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा के लिए भारत के दूसरे और बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-2 मिशन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पूरी तरह से तैयार है। यह साहसिक अभियान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास इसरो का पहला मिशन होगा। इसरो ने अपने पहले चंद्र मिशन में स्पेसक्राफ्ट के साथ पीएसएलवी रॉकेट को चंद्रमा की कक्षा में लैंड किया था। लेकिन इस बार भारी पेलोड उठाने वाला जीएसएलवी एमके द्वितीय 2390 किलोग्राम वजन वाले अंतरिक्ष यान का शुभारंभ करेगा, क्योंकि मॉड्यूल एक ऑर्बिटर, एक रोवर और लैंडर को चांद तक ले जाएगा।

इसरो के अध्यक्ष डॉ. सिवान ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स आॅफ इंडिया को दिए अपने इंटरव्यू में चंद्रयान मिशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चंद्रयान -2 चुनौतीपूर्ण मिशन है, क्योंकि हम पहली बार एक कक्षा, एक लैंडर और एक रोवर को चंद्रमा पर ले जाएंगे। लांच अप्रैल में होना है जिसमें कुछ ही समय बचा है। इसे श्रीहरिकोटा से इसे लॉन्च किया जाएगा और लॉन्च होने के एक से दो महीनों में यह यान चंद्रमा की कक्षा तक पहुंच जाएगा। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3,82,000 किलोमीटर दूर है।

डॉ. सिवान ने अपने इंटरव्यू में बताया कि चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने के बाद, लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंडिंग करेगा। लैंडर के अंदर लगे 6-पहिए वाले रोवर अलग हो जाएंगे और चंद्रमा की सतह पर आगे बढ़ेंगे। रोवर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह चंद्रमा की सतह पर 14 दिन तक रह पाएगा और 150-200 किमी तक चलने में सक्षम होगा।

इसरो के चेयरमैन ने कहा, 'रोवर फिर 15 मिनट के भीतर चंद्रमा की सतह के आंकड़े और छवियों को पृथ्वी पर भेज देगा। 14 दिनों के बाद रोवर स्लीप मोड में जाएगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि एक बार फिर रोवर काम करेगा जब चांद पर धूप होगी और उसके सोलर सेल दोबारा रिचार्च होंगे।'