Chandrayaan 2: IIT कानपुर ने 3 साल में तैयार किया 'लुनर रोवर'

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जुलाई): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO का दूसरा मून मिशन Chandrayaan 2 चांद को छूने को तैयार है।   श्रीहरिकोटा में इसकी लॉन्चिंग की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। अब से कुछ देर बाद दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान 2 उड़ान भरेगा। चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं। लगभग 44 मीटर लंबा 640 टन का जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (GSLV Mk III) एक सफल फिल्म के हीरो की तरह सीधा खड़ा है। रॉकेट में 3.8 टन का चंद्रयान अंतरिक्ष यान है. रॉकेट को 'बाहुबली' नाम दिया गया है। 

अपनी उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पार्किंग में 170 गुणा 40400 किलीमीटर की कक्षा में रखेगा। चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे। लैंडर-विक्रम 6 सितंबर को चांद पर पहुंचेगा और उसके बाद प्रज्ञान रोवर प्रयोग शुरू करेगा। 

दरअसल, चंद्रयान-2 भारत का दूसरा चंद्रमा मिशन है। इस मिशन की खासियत यह है कि पहली बार भारत चंद्रमा की उत्तरी सतह पर 'लुनर रोवर' उतारेगा। IIT कानपुर द्वारा निर्मित 'लुनर रोवर' यानी मानवरहित चंद्रयान को चंद्रमा पर भेजा जाएगा, जो चंद्रमा की सतह के कई रहस्यों से पर्दा उठाएगा। यह पहली बार है कि मानवरहित चंद्रयान भारत की ओर से चंद्रमा की उत्तरी सतह पर लैंड करेगा, जो पूरी दुनिया के लिए अभी अछूता है। 

यह चंद्रयान चंद्रमा से 3D इमेज इसरो को भेजेगा। यह पहला मौका है, जब चंद्रमा के उत्तरी हिस्से में किसी देश की ओर से कोई चंद्रयान उतारा जा रहा है। इसको लेकर पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हुई हैं। आईआईटी कानपुर द्वारा निर्मित 'लुनर रोवर' को तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया जा सका है। इसको तैयार करने में लगभग 50 लाख रुपये की लागत आई है।