क्या चंद्रयान-2 को हैक कर लिया गया है ?

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 सितंबर): इसरो के वैज्ञानिक संपर्क टूटने के बाद से लगातार चंद्रयान 2 से संपर्क साधने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन इस बीच में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने जिस तरह की आशंका जताई है, वो काफी ज्यादा चौंकाने वाला है। उनका दावा है कि हो सकता है चंद्रयान 2 को हैक कर लिया गया हो। ऐसे में सवाल उठता है कि

-  क्या ऐसा संभव है कि चंद्रयान 2 को हैक किया जा सकता है ?

- क्या चंद्रयान-2 को हैक कर लिया गया है ? 

- ... तो क्या किसी ने लैंडर विक्रम को हैक कर लिया है ?  

- क्या हिन्दुस्तान के सपनों के साथ साजिश की गई है ? 

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गौरतलब है कि अभी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो लगातार कोशिश में है। इसरो के वैज्ञानिक लगातार चंद्रयान-2 के मिशन को लेकर अपडेट भी उपलब्ध करा रहे हैं। अपने सबसे लेटेस्ट अपडेट में इसरो ने कहा है कि विक्रम लैंडर के लोकेशन का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने पता लगा लिया है, लेकिन अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। विक्रम लैंडर से कम्यूनिकेशन स्थापित करने को लेकर सभी प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इन बातों के बीच जिस तरह अचानक लैंडर विक्रम का इसरो से संपर्क टूट गया उसपर कई तरह के सवाल उठे रहे हैं। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने जो आरोप लगाया है वो काफी ज्यादा चौंकाने वाला है। वरिष्ठ स्पेस साइंटिस्ट डॉक्टर राम श्रीवास्तव ने आशंका जताई है कि कहीं इस पूरे सिस्टम को हैक तो नहीं कर लिया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक के इस आरोप के बाद से सोशल मीडिया पर ये खबर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। साथ-साथ दावा ये भी है कि इस दिशा में भी इसरो के वैज्ञानिकों को सोचना चाहिए और इसकी जांच भी होनी चाहिए। 

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वायरल खबर क्या है ? 

- लैंडर विक्रम के हैक की संभावना से इंकार नहीं 

- इसरो वैज्ञानिकों को इस पर सोचना चाहिए  

- सिर्फ 2.1 किलोमीटर दूर रहकर संपर्क टूटना समझ से बाहर

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वरिष्ठ वैज्ञानिक की इस आशंका के बाद से सोशल मीडिया पर ये खबर काफी तेजी से वायरल हो रहा है और इस बात पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि क्या ऐसा संभव है ? क्या ऐसा हो सकता है कि इस पूरे सिस्टम को ही किसी ने हैक कर लिया हो। इस पूरे मिशन को मैंने बहुत करीब से देखा और जब लैंडर विक्रम लैंडिग से जब महज 2.1 किलोमीटर दूर था, उसमें एक जर्क- सा लगा और विक्रम अपने निर्धारित ट्रैक से हट गया। अपने स्पेस साइंस के अनुभव के आधार पर कह सकते हैं कि अगर लैंडर विक्रम का टकराने के बाद संपर्क टूटता तो यह बात समझ में आती लेकिन चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर दूर रहकर संपर्क टूटना उनकी समझ में नहीं आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसा संभव हो सकता है या फिर ये संभव नहीं है। इधर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के हवाले से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक 'चंद्रयान-2 का लैंडर 'विक्रम' चांद की सतह पर सलामत और साबुत अवस्था में है और यह टूटा नहीं है। हालांकि, 'हार्ड लैंडिंग की वजह से यह झुक गया है..और इससे पुन: संपर्क स्थापित करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। हालांकि जिस तरीके से वरिष्ठ वैज्ञानिक ने चद्रयान 2 को लेकर आरोप लगाया है। उसकी पड़ताल जरूरी है। इससे पहले 7 सितंबर को 'विक्रम' को 'सॉफ्ट लैंडिंग' के प्रयास के अंतिम वक्त में  इसरो के कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया था। जब यह चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था..लैंडर के भीतर 'प्रज्ञान' नाम का रोवर भी है।

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दूसरी तरफ इसे लेकर इसरो समेत तमाम वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान 2 ने अपना 95 फीसदी तक लक्ष्य हासिल कर लिया है और इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि ऑर्बिटर अगले सात सालों तक चांद का चक्कर लगाता रहेगा और महत्वपूर्ण जानकारियां देता रहेगा। इसरो के वैज्ञानिकों ने संपर्क टूटने के महज 35 घंटे बाद ही विक्रम लैंडर को खोज निकाला। ये उपलब्धि इसलिए बड़ी मानी जा रही है। क्योंकि इससे पहले यूरोपियन स्पेस एजेंसी का भी एक यान जिसका जमीन से संपर्क टूट गया था उसके बारे में वैज्ञानिकों को 12 साल बाद जानकारी मिली थी। ऐसा नहीं है कि केवल भारत को ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान असफलता मिली हो। अमेरिका और रूस जैसे देशों को भी अपने चांद अभियानों में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। शुरुआत में तो चांद पर पहुंचने की सफलता दर बेहद कम थी लेकिन जैसे-जैसे तकनीक बदलती गई इसमें बदलाव आता गया। चांद मिशन में असफल रहने वाला भारत अकेला देश नहीं है। जहां चांद मिशन में अमेरिका 26 बार असफल रहा है वहीं रूस अब तक चांद मिशन में 14 बार नाकाम रहा है।

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इधर विज्ञान के जानकार चांद के साउथ पोल की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की असफल कोशिश को एक छोटा झटका मानते हैं और इस झटके से मिली सीख के बाद इसरो भविष्य के मिशनों के लिए इस्तेमाल कर सकता है। ये भी बार-बार कहा जा रहा है कि चंद्रयान-2 मिशन पूरी तरह असफल नहीं रहा है। लेकिन सवाल अब भी वही हैं कि क्या चंद्रयान 2 हैक भी हो सकता है ?