Chandrayaan 2: इस लिहाज से है अहम भारत का मिशन चंद्रयान

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जुलाई): भारत के लिए आज बेहद खास दिन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष में इतिहास रचने से बच चंद घंटे दूर है। इसरो के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2  को लेकर 'बाहुबली' रॉकेट दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरेगा। इसके लिए रविवार शाम छह बजकर 43 मिनट पर उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इसरो के प्रमुख डॉ. के सिवन ने कहा है कि मिशन चंद्रयान-2 पूरी तरह से कामयाब सबित होगा और चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा। 

आपको बता दें के चंद्रयान-2 भारत का दूसरा मून मिशन है। पहली बार भारत चंद्रमा की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा। वहां पर चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह, वातावरण, विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा। इसे तैयार करने में करीब 11 साल लग गए। लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने इस मिशन को पूरा करने के लिए जी-जान लगा दी। आखिर पूरी तरह स्वदेशी चंद्रयान-2 मिशन किस लिहाज से अहम है और चंद्रयान-1 से यह किन मायनों में एक कदम आगे है। 

खास बात यह है कि चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी हिस्से पर लैंड करेगा। इसके साथ ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन अपने यानों को चांद की सतह पर भेज चुके हैं। अभी तक किसी भी देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास यान नहीं उतारा है।

दिव्यांश के पिता सूरजभान सिंह ने बातचीत में कहा कि पुलिस हमें कह रही है की हमने लगभग 40 कर्मियों को इस काम में लगाया है। इस नाले का जो दूसरा छोर है हम वहां तक गए लेकिन उस जगह पर बीएमसी या दमकल विभाग का एक भी कर्मचारी नहीं है। हमसे लगातार झूठ बोलकर हमें बेवकूफ बनाया जा रहा है। लगभग 24 घंटे बीत चुके हैं लेकिन मेरा बेटा अब तक नहीं मिल पाया है। प्रशासन का कहना है कि जब तक दिव्यांश नहीं मिल जाता है, सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा। 

चंद्रयान 2 की खासियतें...

1. पहला अंतरिक्ष मिशन जो चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का संचालन करेगा

2. पहला भारतीय अभियान, जो स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर उतरा जाएगा

3. पहला भारतीय अभियान जो देश में विकसित प्रौद्योगिकी के साथ चाँद की सतह के बारे में जानकारियां जुटाएगा

4. चंद्रमा की सतह पर रॉकेट उतारने वाला चौथा देश