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ममता के सामने टिक नहीं पाए नेताजी का यह पड़पोता

नई दिल्ली (19 मई): पश्चिम बंगाल के चुनावी नजीते आने के बाद ममता बनर्जी बहुमत के साथ सरकार बनाने का दांवा कर सकती है। यहां पर बीजेपी ने भी अपना जनाधार मजबूत करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते चंद्र कुमार बोस को मैदान में उतारा था, लेकिन ममता बनर्जी के आगे चंद्रकुमार बोस फेल हो गए।

चंद्र कुमार बोस को ममता के सामने करारी हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले चंद्रकुमार को बीजेपी में शामिल करके ममता के खिलाफ भबानीपुर से चुनाव लड़वाया था, लेकिन बोस तीसरे नंबर पर रहे। नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने पर मोदी सरकार की चंद्रकुमार बोस से खूब तारीफ की थी। चंद्रकुमार ने कहा था कि पीएम मोदी की कुछ बातें नेताजी सुभाष चंद्र बोस से मिलती हैं। चंद्र कुमार राजनीति में पहली बार आए, लेकिन पहली बार में ही नाकामयाबी हाथ लगी।  

1982 में चंद्र कुमार ने लंदन से पढ़ाई पूरी करने के बाद जमशेदपुर में टाटा मैनेंजमेंट ट्रेनिंग सेंटर में नौकरी शुरू की थी। कुछ समय के बाद ही वो कोलकाता पहुंचे और वहां टाटा में ही बतौर सेल्स मैनेजर काम करने लगे। 18 सालों तक वो टाटा से जुड़े रहे। 2000 में बोस ने टाटा कंपनी की नौकरी छोड़ दी और अपनी कंपनी खोली उन्होंने चार सालों तक स्वतंत्र सलाहकार के तौर पर काम किया। 2004 में चंद्र कुमार ने बोस इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की, उनकी यह कंपनी अभी भी चल रही है। चंद्र कुमार बोस की पत्नी का नाम अनीत मेनन बोस है, दोनों कोलकाता में ही रहते हैं।


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