चंद्र ग्रहण 2019: चंद्र ग्रहण के दौरान भूल कर भी न करें ये काम

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (16 जुलाई): इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण आज लगने जा रहा है। भारत के अलावे ये चंद्रग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा। हिंदू पंचांग देखें तो इस बार चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। यह चंद्रग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है। इस दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा भी है। हिन्दू धर्म में चंद्र ग्रहण और पूर्णिमा दोनों का ही खास महत्व है। इस बार की गुरु पूर्णिमा भी 16 जुलाई को है, जिस पर चंद्र गहण का साया है। बताया जा रहा है कि 149 साल बाद  ऐसा संयोग बन रहा है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। इस बार चंद्र ग्रहण का समय 3 घंटे का होगा। यह 16 जुलाई और 17 जुलाई के बीच यानी मंगलवार रात 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और 4 बजकर 30 मिनट तक चलेगा। ग्रहणकाल में प्रकृति के भीतर कई तरह की नकारात्मक और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। हिन्दू धर्म में चंद्र ग्रहण को काफी अहमियत दी गई है। इसको लेकर कई तरह की मान्यताएं भी हैं।

चंद्रग्रहण के दौरान न करें ये काम...

- मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान लोगों को कुछ भी नहीं खाना चाहिए। अगर कुछ खाने का मन है तो चंद्रग्रहण शुरू होने से पहले या फिर खत्म होने के बाद खा लें।

- चंद्रग्रहण के समय ऐसी महिलाएं घर से बाहर न निकलें जो प्रेग्नेंट हैं। इसके अलावा सुईं व नुकीली चीजों का उपयोग भी नहीं करना चाहिए।

- चंद्रग्रहण के समय लोगों को कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए। इसके अलावा जितने समय तक चंद्रग्रहण रहता है, उस वक्त तक भगवान की पूजा अर्चना न करें।

- चंद्रग्रहण के दौरान भगवान के मंदिर के दरवाजों को भी बंद रखना शुभ माना जाता है।

- ग्रहण काल के दौरान आलस्य ना करें। ग्रहण काल से पहले स्नान कर लें।

सूतक काल...

सूर्य ग्रहण में सूतक काल ग्रहण के प्रारंभ से 12 घंटे पूर्व ही लग जाता है, ठीक वैसे ही चंद्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण प्रारंभ से 9 घंटे पूर्व लगता है। ऐसे में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ रात में 01:31 बजे हो रह है तो सूतक काल 9 घंटे पूर्व यानी शाम को 04:30 बजे से ही लग जाएगा। चंद्र गहण के मोक्ष होने तक सूतक काल होता है।ऐसी रहेगी ग्रहों की स्थिति...इस चंद्र ग्रहण के समय राहु और शनि चंद्रमा के साथ धनु राशि में स्थित रहेंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति होने के कारण ग्रहण का प्रभाव और भी अधिक नजर आएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि राहु और शुक्र सूर्य के साथ रहेंगे। साथ ही चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में सूर्य रहेगा। इस स्थिति में मंगल नीच का हो जाएगा। ग्रहण के समय ग्रहों की ये स्थिति तनाव बढ़ाने वाला साबित होगा। ऐसे में प्राकृतिक आपदाएं आने की आशंका रहेगी।