चांदनी चौक में पड़े छापे को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, अभी तक 25 करोड़ बरामद

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (4 दिसंबर): राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक में आयकर विभाग ने 300 लॉकरों के एक निजी केंद्र की जांच-पड़ताल करने के बाद 25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं। विभाग को इनमें 100 से अधिक लॉकरों में कर चोरी कर नकदी और आभूषण जमा किए जाने का अंदेशा था। अभी तक इनमें से 39 लॉकर खोले जा चुके हैं जिससे 25 करोड़ रुपये की नकदी प्राप्त हुई है। 

सीबीडीटी चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि करीब 70 देशों से हमे ऑटोमेटिक रुट से इनकम की जानकारी मिल रही है और इसमे बढ़ोतरी भी हो रही है। ऑटोमेटिक सिस्टम से आयकर विभाग को पता चल रहा है कि कौन विदेश यात्राएं कर रहा है और अपनी इनकम कम से कम बता रहा है। ये ऑटोमेटिक सिस्टम से पता चल रहा है। पिछले साल 4500 मामलों में कार्यवाई की गई थी।

पिछले साल हमने करीब 2 करोड़ ईमेल और एसएमएस भेजे जो टैक्स के दायरे में आ रहे थे, लेकिन टैक्स फ़ाइल नहीं कर रहे थे। इसका नतीजा ये हुआ कि 3 लाख में से करीब 2.20 लाख रिटर्न फ़ाइल हुए है बाकी को चेक कर रहे हैं।

चांदनी चौक पर प्राइवेट वॉल्ट में पड़ रहे इनकम टैक्स के छापे पर सीबीडीटी चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा है कि लॉकर की KYC सही तरीके से नहीं हुई थी। इसलिए हम सभी लाकर के मालिकों से उनके डिपाजिट के बारे पूछताछ कर रहे हैं और जिनके बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है, उस रकम को जब्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक करीब 25 करोड़ रुपये अघोषित आय का पता लॉकर की छापेमारी से मिला है।

लॉकरों का परिचालन चांदनी चौक का ही एक व्यापारी कर रहा था। इसके परिचालन के लिए उसने 1992 में भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति प्राप्त की थी। इसमें करीब 300 निजी लॉकर थे। इसमें खारी बावली, चांदनी चौक और नया बाजार के व्यापारियों ने अपनी नकदी और आभूषण जमा कराए थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इनमें से 100 से अधिक लॉकरों में कथित तौर पर कर चोरी करके बेहिसाब नकदी और आभूषणों के रखे जाने का अंदेशा था। बाद में इन लॉकरों को एक-एक करके खोला गया।

इनकम टैक्स के अधिकारियों के मुताबिक नगदी का सही हिसाब नहीं देने पर व्यापारियों को एक करोड़ रुपये की नकदी के बदले 1.4 करोड़ रुपए देने पड़ सकते हैं। अगर ये रुपए कालेधन साबित हुए तो एक करोड़ की राशि पर 35 लाख टैक्स और 105 फीसदी तक जुर्माने के प्रावधान की वजह से उन्हें 1.4 लाख करोड़ रुपए देने होंगे। ऐसे में जो व्यापारी कैश में मिले 25 करोड़ रुपए का सही हिसाब देने में सक्षम नहीं होंगे, वे अपने रुपए को क्लेम नहीं करेंगे।