भारत में है ये अद्भुत स्थान, जहां पाकिस्तानी रेंजर भी झुकाते हैं मस्तक

नई दिल्ली ( 6 नवंबर ) : भारत में एक जगह ऐसी है जहां पाकिस्तानी रेंजर न सिर्फ आते हैं, बल्कि सिर भी झुकाते हैं। यह स्थान जम्मू से 45 किमी दूर रामगढ़ सेक्टर में स्थित है। 

भारत-पाक जीरो लाइन पर स्थित हिंदु-मुस्लिम भाईचारे की प्रतीक विश्व प्रसिद्ध बाबा चमलियाल की दरगाह है। यहां हर साल मेला लगता है। इस मेले में भारत-पाकिस्तान सीमा का बंधन टूट जाता है। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बाबा के दरगाह पर दुश्मन समझे जाने वाले पाकिस्तानी भी आकर एक दूसरे के गले मिलते हैं। 

भारत पाकिस्तान बंटावारे के बाद से ही यह परंपरा चली आ रही है। यहां हर साल मेले पर हजारों लोग जुटते हैं। मजार पर माथा टेकने के लिए राज्य के अलावा बाहर से भी लोग आते हैं। 

सांबा जिले की भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऐतिहासिक बाबा चमलियाल मेले में हर साल हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मजार पर माथा टेकने के लिए राज्य के अलावा बहार से भी लोग आते हैं। वे खुद दरगाह पर चादर चढ़ाकर सिर झुकाते हैं। लौटते समय पाक रेंजर ट्रेक्टर के साथ पानी के टैंकर तथा मिटटी की ट्रॉलियां ले जाते हैं। पानी को शरबत तथा मिटटी को शक्कर के नाम से पुकारा जाता है।    इस सीमा चौकी पर एक मजार होने से मेले के साथ धार्मिक भावनाएं भी जुडी हैं। कहा जाता है कि जिस कुएं का पानी सीमा पार भेज जाता है, उसमें गंधक की मात्रा बहुत अधिक है। इस विशेष स्थान की मिट्टी में कुछ ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो चर्म रोगों के इलाज में कारगर होते हैं। इसलिए इस पानी तथा मिटटी का लेप बना चार्म रोगी शरीर पर लगाकर चार्म रोगों से मुक्ति पाते हैं।    अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज पचास गज पीछे यह मेला लगता है। दिन में कई टैंकर पानी तथा कई ट्रॉलियां मिट्टी उस ओर भिजवाई जाती हैं। बीएसएफ तथा पाकिस्तानी रेंजर इन रिवाजों को आज भी निभाते आ रहे हैं।