सरकार को उम्मीद दो वर्षों में कैश के बराबर होगा डिजिटल पेमेंट

नई दिल्ली(20 नंवबर): आठ नवंबर की आधी रात के बाद से देश में पैसों के लेन-देन का सिस्टम बदल गया है। जहां पहले 90 फीसदी तक पेमेंट नगदी में होते थे वहीं अब डिजिटल पेमेंट्स में तेजी आई है। बीते 10 दिनों में डिजिटल पेमेंट्स दो गुना बढ़ गए हैं। 

- पेमेंट के इस दूसरे ऑप्शन्स को आसानी से इस्तेमाल करने के लिए लोग ऐप भी जमकर डाउनलोड कर रहे हैं।

- जबकि पेमेंट के अलग-अलग जरिए में तीन गुना तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की जा चुकी है। 

- इस ट्रेंड के बाद सरकार के नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) जैसे संस्थानों को उम्मीद है कि अगले दो साल में ऑन लाइन और कैश पेमेंट का अनुपात 50:50 पर आ जाएगा।

- 10 साल पहले भारत में होने वाले कुल पेमेंट में सिर्फ तीन फीसदी ही ऑनलाइन या दूसरे जरियों से किया जा रहा था।

- इस राह में 71.25 करोड़ डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल बढ़ाने, देश में मौजूद मात्र 15 लाख पॉइंट ऑफ सेल (स्वैप मशीन) की संख्या बढ़ाने, इंटरनेट बैंकिंग को बढ़ाना, नई नगदी आने के बाद कैश ट्रांजेक्शन को रोकना चुनौती, नगदी की तुलना में डिजिटल पेमेंट महंगा होने जैसी चुनौतियां हैं इससे निपटे बगैर दो वर्ष में 50-50 फीसदी का अनुपात लाना मुश्किल होगा।

- गौरतलब है कि डेबिट कार्ड धारकों के द्वारा 80 फीसदी से अधिक ट्रांजेक्शन जुलाई माह के दौरान सिर्फ नगदी निकालने के लिए ही होता है। 

- मतलब एटीएम से पैसा निकालने के बाद भुगतान कैश में ही हो रहा है। वर्तमान में अमेरिका जैसे देश में अभी यह यह अनुपात 70:30 का है।

- अभी तक देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के ऐप का डाउनलोड तीन गुना बढ़ चुका है। वहीं आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक के डेबिट कार्ड से लेन-देन बीते एक सप्ताह में दो गुना बढ़ गया है। 

- भारत की इकॉनामी में जहां आठ नवंबर से पहले होने वाला रुपयों के लेन-देन में नगदी की हिस्सेदारी 90 फीसदी और डिजिटल माध्यमों- ऑन लाइन, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, मोबाइल ऐप्स, यूपीआई आदि के द्वारा होने वाले पेमेंट की हिस्सेदारी 10 फीसदी की थी। 

- लेकिन 18 तारीख तक आते-आते इन पेमेंट में कुल 150 से 200 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। मोबाइल बैकिंग रजिस्ट्रेशन में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है।

- नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के एमडी और सीईओ एपी होता के मुताबिक आठ नंवबर तक मोबाइल रजिस्ट्रेशन 11 करोड़ थे।

- लेकिन 10 दिन के अंदर यह संख्या बढ़कर 12 करोड़ हो गई है। अभी चेक क्लियरेंस और ऑन लाइन पेमेंट का अनुपात 60:40 है लेकिन मार्च 2017 के बाद ऑन लाइन पेमेंट की राशि तीन गुना तक अधिक हो सकती है। 

- होता के मुताबिक 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद और अल्टरनेट माध्यमों से पेमेंट्स का प्रचलन शुरू होने से अगले दो वर्ष में देश में नगदी और ऑन लाइन पेमेंट्स 50-50 फीसदी होगा। 

- उन्होंने कहा कि कुछ चीजों में अवश्य सुधार की गुंजाइश है जैसे बिजली, पानी, मोबाइल आदि का भुगतान 90 फीसदी नगद होता है जिसे सुधारा जाना चाहिए।      - बस किराए का 95 फीसदी भुगतान नगद में होता है। केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों को दो दिन पहले ही अपने इलेक्ट्रॉनिक पमेंट चार्ज कम करने के लिए कहा है, यह जल्द कम होगा। 

- वहीं साइबर मीडिया रिसर्च (सीएमआर) के फैसल कौसा के अनुसार देश में इस समय स्मार्ट फोन धारकों की संख्या करीब 28 करोड़ है। 

- लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मोबाइल ऐप का प्रयोग करने वाले लोग छोटो पेमेंट जैसे धोबी, सफाई वाला, दूध और सब्जी आदि के पेमेंट नगदी में नहीं होंगे। 

- जबतक यह पेमेंट नगदी में होंगे तब तक अगले दो वर्ष में यह कैश लेस ट्रांजेक्शन 50 फीसदी हो पाना थोड़ा कठिन है।    - एक्सिस बैंक के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, कार्ड्स एंड पेमेंट संग्राम सिंह के मुताबिक 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि वो खाता धारक जो डेबिट कार्ड का प्रयोग डेली नहीं कर रहे थे उनमें से 20 से 25 फीसदी फीसदी रेग्युलर प्रयोग कर रहे हैं। 

- डेबिट कार्ड से लेन-देन और यूपीआई डाउनलोड दो गुना बड़ा है जबकि कीमत में यह इजाफा 85 फीसदी का है। साथ ही पीओएस से ट्रांजेक्शन तीन गुना बढ़ा है। 

- साथ ही पीओएस मशीन लेने वालों की ऐप्लीकेशन में भी तीन गुना की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। मशीन के लिए डॉक्टर जैसे प्रोफेशन के लोगों की भी ऐप्लीकेशन आ रही है।