चाचा-भतीजे की लड़ाई, भारतीय राजनीति में कोई नई नहीं

नई दिल्ली(16 सितंबर): समाजवादी पार्टी में छिड़ा 'महाभारत' आज तोड़ा शांत होता दिखा। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने खुद मोर्चा संभाला और मुलाकात का दौर चलता रहा। शाम होते-होते चाचा शिवपाल से छिने गए सभी मंत्रालय वापस कर दिए गए तो बर्खास्त किए गए मंत्री गायत्री प्रजापति की भी कैबिनेट में वापसी हो गई। कई दिनों तक चला चाचा-भतीजे का झगड़ा  हर दिन एक नया रंग लेते गया।

झगड़े की शुरुआत

जब मुलायम सिंह ने अखिलेश की जगह छोटे भाई शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो सीएम अखिलेश को नाराज होने की वजह मिल गई। बस फिर क्या था अखिलेश ने शिवपाल से सारे अहम मंत्रालय छीन लिए। अखिलेश-शिवपाल के इस  झगड़े को हाल की दिनों का अगर सबसे बड़ा पॉलिटिकल ड्रामा कहें तो गलत नहीं होगा। 

हालांकि भारतीय राजनीति में ये कोई पहली  बार नहीं किसी चाचा-भतीजे की लड़ाई इस तरह सामने आई हो।  

बाल ठाकरे- राज ठाकरे

महाराष्ट्र की राजनीति के दो बड़े नाम बाल ठाकरे और राज ठाकरे। दोनों के बीच का मनमुटाव किसी से भी छिपा नहीं। ये मनमुटाव भारतीय राजनीति को हिला के रख दिया। ये मनमुटाव इस वजह से हो सकता क्योंकि दोनों का स्वभाव एक ही था। दोनों ही आक्रामक थे। हालांकि उद्धव ठाकरे के उदय ने चाचा-भतीजे के बीच थोड़ी शांति लाई। राज ने 2006 में शिवसेना छोड़ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी नई पार्ठी बनाई। 

शरद पवार- अजित पवार

शरद और अजित के रिश्तों में कड़वाहट आना तब शुरू हुई जब सुप्रिया सुले एनसीपी में एक्टिव हुईं। इसके बाद अजित को महाराष्ट के उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। 

प्रकाश बादल मनप्रीत बादल

दोनों चाचा-भतीजा के रिश्तों के बीच कड़वाहट तब शुरू हुई जब मनप्रीत को पंजाब कैबिनेट और शिरोमणि अकाली दल से बाहर का रास्ता दिखाया गया। मनप्रीत ने इसके बाद कांग्रेस ज्वाइन की। 

गोपीनाथ मुंडे- धनंजय मुंडे

गोपीनाथ मुंडे और भतीजे धनंजय के बीच का झगड़ा तब सामने आया जब धनंजय ने बीजेपी नेता के खिलाफ विद्रोही सुर अपनाया। धनंजय ने इसके बाद शरद पवार की एनसीपी से हाथ मिलाया।