जल्द ही शुरू होगा चाबहार बंदरगाह, पाक-चीन परेशान


नई दिल्ली (4 अगस्त): सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया कि चाबहार बंदरगाह आने वाले 12-18 महीने में शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने से भारत को अफगानिस्तान और ईरान के साथ व्यापार करने में काफी मदद मिलेगी।

इससे भारत को ईरान में अपने पैर जमाने और पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, रूस और यूरोप तक सीधी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, कांडला एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी, नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है। इसलिए इस समझौते से हमें पहले वस्तुएं ईरान तक तेजी से पहुंचाने और फिर नए रेल एवं सड़क मार्ग के जरिए अफगानिस्तान ले जाने में मदद मिलेगी।

गडकरी ने कहा कि ईरान के पास सस्ती प्राकृतिक गैस और बिजली है और भारतीय कंपनियां 50 लाख टन का एल्यूमीनियम स्मेल्टर संयंत्र और यूरिया विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना चाहती हैं। नाल्को एल्यूमीनियम स्मेल्टर स्थापित करेगी जबकि निजी एवं सहकारी उर्वरक कंपनियों यूरिया संयंत्र बनाने की इच्छुक हैं बशर्ते उन्हें दो डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से कम की दर पर गैस मिले। उन्होंने कहा कि रेलवे का पीएसयू इरकॉन चाबहार में एक रेल लाईन का निर्माण करेगा ताकि अफगानिस्तान तक सीधे सामान पहुंचाया जा सके।

गडकरी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टस्ट और कांडला पोर्ट टस्ट की संयुक्त उद्यम इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड यहां 640 मीटर लंबी दो कंटेनर गोदी और तीन बहु मालवाहक गोदी के निर्माण पर 8.5 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। भारतीय कंसोर्टियम ने आरिया बनादेर इरानियन के साथ बंदरगाह समझौता किया। उन्होंने कहा, 'यह अनुबंध 10 साल के लिए है और इसका विस्तार किया जा सकता है। हमें पहले चरण का निर्माण पूरा करने में 18 महीने का समय लगेगा। अनुबंध के पहले दो साल की अवधि छूट अवधि है जिसमें भारत को किसी कार्गो के लिए गारंटी नहीं देनी है। तीसरे साल से भारत चाबहार बंदरगाह पर 30,000 टीईयू कार्गो की गारंटी देगा जो 10वें साल में बढ़कर 2,50,000 टीईयू तक पहुंच जाएगा।'