चीन-पाकिस्तान को जवाब, भारत ने संभाली चाबहार बंदरगाह की संचालन कमान

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (8 जनवरी): चीन और पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। भारत ने चाबहार बंदरगाह की संचालन की कमान संभाल ली है। अफगानिस्तान एवं मध्य एशिया के लिए मालवहन की दृष्टि से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरान के दक्षिण पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह के संचालन की कमान भारत को मिलना प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मानी जा रही है। गौरतलब है कि भारत ने पहली बार किसी विदेशी बंदरगाह को संचालित करने की जिम्मेदारी संभाली है। यह बंदरगाह ईरान में समुद्र के दक्षिणी तट पर स्थित है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के काफी करीब है। इससे भारत की मध्य-पूर्व देशों से भी दूरी बहुत कम हो जाएगी। ईरान के तेल-गैस संपन्न सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह की पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से दूरी महज 80 किलोमीटर दूरी है। ग्वादर पोर्ट पर चीन का नियंत्रण है और इसके जरिये वह मध्य एशिया के करीब पहुंचता है।

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जहाजरानी मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस बात की जनाकारी दी है। जानकारी के मुताबिक 24 दिसंबर को हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत शाहिद बेहिश्ती पोर्ट, चाबहार के एक हिस्से के कामकाज को संचालित करने की जिम्मेदारी संभाली है। समझौते के बाद भारतीय, ईरानी और अफगान प्रतिनिधिमंडलों ने संयुक्त रूप से भारतीय कार्यालय इंडियन एसपीवी का उद्घाटन किया। 29 दिसंबर को वास्तविक रूप में टर्मिनल एरिया, कार्गो हैंडलिंग इक्विपमेंट और ऑफिस बिल्डिंग भारतीय कर्मियों के नियंत्रण में आ गए। 30 दिसंबर को 72,458 मीट्रिक टन खाद्यान्न लेकर साइप्रस का जहाज बंदरगाह पर पहुंचा और भारतीय कर्मियों ने उसका माल उतारा। इसी के साथ भारत ने सहयोग के नए काल में प्रवेश किया। इस बंदरगाह के जरिये भारत जमीनी सीमाओं से घिरे अफगानिस्तान की बेहतर तरीके से मदद कर पाएगा।

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आपको बता दें कि चाबहार पोर्ट को लेकर भारत और ईरान के बीच 2003 में बातचीत शुरू हुई थी लेकिन 2014 के आखिर में इसपर महत्वपूर्ण सफलता मिली। उस समय दोनों देशों ने चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कार्य मई 2015 में पूरा करना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेहरान यात्रा के दौरान 23 मई, 2016 को दोनों देशों के बीच एक और समझौता हुआ जिसके चलते बंदरगाह का कामकाज दस साल के लिए भारत के हाथ में रहना है। ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी की फरवरी 2018 में भारत यात्रा के दौरान बंदरगाह के विकास के कुछ और समझौतों पर फिर से दस्तखत हुए। भारत ने इस बंदरगाह के विकास पर 85.21 मिलियन डॉलर (592 करोड़ रुपये) खर्च किए हैं।