प्रकाश से भी तेज चलने वाले पार्टिकल्स की खोज, डिसअप्रूव होगी आइंसटीन की थियरी!

नई दिल्ली (23 जनवरी): पिछले तीन सालों में दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने पार्टिकल फीजिक्स के क्षेत्र में एक अहम प्रयोग किया। जिसमें किए गए मापन से पता चला है कि जेनेवा के पास नाभिकीय शोध करने वाली यूरोपीय संस्था, CERN से उत्सर्जित किए गए न्यूट्रिनोस इटली के ग्रैन सैसो तक अभी तक ज्ञात प्रकाश की गति से भी ज्यादा तेज गति से पहुंच गए। इस यात्रा में न्यूट्रिनोस को 60 नैनो सैकेंड्स का समय लगा। जो कि प्रकाश की गति से भी ज्यादा है। बता दें, न्यूट्रिनोस वे नन्हें पार्टिकल्स होते हैं जो ब्रह्मांड में व्याप्त रहते हैं। वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह के प्रवक्ता एन्टोनियो एरीडिटैटो ने इस बारे में बताया है। 

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक, एन्टोनियो ने बताया, ''हमें अपने निष्कर्ष पर काफी भरोसा है। हमने हर उस त्रुटि को दूर करने के लिए अपने मापन का कई बार निरीक्षण किया है। लेकिन हमें कोई भी त्रुटि नहीं मिली।'' उन्होंने कहा, ''हम अब चाहते हैं कि हमारे साथी स्वतंत्र रूप से इसका निरीक्षण करें।''

अगर, इस प्रयोग की पुष्टि हो जाती है, तो यह खोज अल्बर्ट आइंसटीन की 1905 की 'थियरी ऑफ स्पेशल रिलेटिविटी' को कमजोर कर देगी। जो कहती है कि प्रकाश की गति एक 'ब्रह्मांडीय स्थिरांक' है और इस ब्रह्मांड में कुछ भी इससे तेज नहीं चल सकता। इस तथ्य को पिछली एक सदी से किए जा रहे परीक्षणों से समझा जाता रहा है। जो कि भौतिक विज्ञान के 'स्टैंडर्ड मॉडल्स' के प्रमुख तत्वों में एक है। जो ब्रह्मांड में होने वाली हर चीज के काम करने के तरीके की व्याख्या करने का प्रयास करती है।

यह अप्रत्याशित निष्कर्ष भौतिक वैज्ञानिकों के OPERA प्रयोग पर की गई रीसर्च से निकलकर आए हैं। ये प्रयोग जेनेवा के पास CERN पार्टिकल रीसर्च सेंटर और ग्रैन सेंट्रल इटली की ग्रैन सैसा लैबोरेट्री ने एक साथ मिलकर किया है। रीसर्च के मुताबिक, इस प्रयोग के लिए न्यूट्रिनोस की 15,000 बीम्स तीन साल के दौरान CERN से 730 किलोमीटर दूर ग्रैन सैसो की तरफ छोड़ी गईं। जहां, बड़े आकार के डिटैक्टर्स में उन्हें पिक-अप किया गया।  

इस प्रयोग में पाया गया कि प्रकाश एक सेंकेंड के 2.4 हजारवें समय में यह दूरी तय कर पाता। लेकिन न्यूट्रिनोस 60 नैनो-सेकेंड्स में ही यह दूरी तय कर गए। जो कि एक सेकेंड समय का 60 अरबवां हिस्सा है। यह प्रकाश बीम्स के पहुंचने के समय से कम समय था। ग्रैन सैसो पहुंचने के लिए न्यूट्रिनोस को CERN के स्पेशल इन्सटालेशऩ से छोड़ा गया था। ये वही स्थान है, जहां लार्ज हैड्रन कोलाइडर स्थित है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति की जांच कर रहा है। इन न्यूट्रिनोस को पानी, हवा और चट्टानों से गुजारा गया था। 

बता दें, इटली की अंडरग्राउंड लैबोरेट्री रोम के दक्षिण में 120 किलोमीटर दूर स्थित है। यह अपनी तरह की दुनिया की सबसे बड़ी लैब है। जो पार्टिकल फिजिक्स और कॉस्मिक रीसर्च के क्षेत्र में काम करती है। 22 देशों के करीब 750 वैज्ञानिक यहां काम करते हैं।