केंद्र ने दिया 'मेट्रोलाइट' ट्रेन का प्रस्ताव, अब छोटे शहरों में भी दौड़ेगी तीन कोच वाली मेट्रो

Image:Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(23 जुलाई): मोदी सरकार ने छोटे शहरों के लिए मेट्रोलाइट नाम का सिस्टम बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह ट्रेनें छोटे शहरों और कस्बों में चलाई जानी हैं। इन शहरों में मेट्रो शहरों जैसे बड़ी संख्या में यात्रा करने वाले नहीं होते, ऐसे में इन ट्रेनों में मात्र 3 कोच लगाने का ही प्लान है। साथ ही इस मेट्रोलाइट ट्रेन की स्पीड को 25 किमी/घं. रखा जाएगा। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री ने इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेट्रोलाइट सिस्टम में ये छोटी ट्रेनें जमीन और जमीन से उठाकर बनाए गए रास्तों दोनों पर ही चलेंगीं।

मंत्रालय के अनुसार मेट्रोलाइट ट्रेनों का निर्माण, मेट्रो शहरों में चलाई जा रही मेट्रो ट्रेनों के मुकाबले बहुत कम दाम पर किया जाना है। साथ ही यह ट्रेनें ज्यादा क्षमता वाली मेट्रो के लिए फीडर सेवा का काम भी कर सकती है। यानि अगर मेट्रो किसी जगह तक आ रही है तो वहां से आगे उस शहर में इस मेट्रोलाइट ट्रेन को चलाया जाएगा। सरकार के सूत्रों के मुताबिक इस तीन कोच की ट्रेन की क्षमता 300 यात्रियों को ले जाने की है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों को ऐसा मेट्रोलाइट सिस्टम विकसित करने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद भी मुहैया कराएगा।

मेट्रोलाइट सिस्टम का रास्ता सड़क मार्गों से अलग बनाए जाने का प्रस्ताव है. ऐसे में इन्हें बनाते हुए सड़क और इस मार्ग के बीच में दीवारें भी बनाई जाएंगीं। जबकि मंत्रालय ने मेट्रो रेल सिस्टम के बारे में कहा है कि इन्हें उन्हें शहरों में विकसित किया जा रहा है, जो बहुत बड़े हैं और जहां पर बड़ी संख्या में यात्री हैं। वर्तमान मेट्रो सिस्टम की सफलता को देखते हुए, कई छोटे शहरों और कस्बों में रेल आधारित तेजी से यात्रियों को ले जाने वाले सिस्टम की जरूरत महसूस की गई। जिसे किसी हल्के शहरी रेल ट्रांजिट सिस्टम से ही पूरा किया जा सकता है।

अपने घोषणापत्र में भी बीजेपी ने मेट्रो के नेटवर्क को 50 शहरों तक बढ़ाने की बात कही थी। 'मेट्रोलाइट' सिस्टम के लिए छाया वाले प्लेटफॉर्म, मेट्रोलाइट के रुकने के प्लेटफॉर्म बनाए जायेंगे। साथ ही इसमें यात्रा करने के लिए यात्रियों के प्रवेश आदि का सिस्टम मेंट्रो ट्रेनों जैसा ही होगा. साथ ही टिकट आदि लेने का सिस्टम भी कमोबेश मेट्रो ट्रेन जैसा ही होगा। मंत्रालय के मुताबिक, मेट्रोलाइट ट्रेनों के तीनों डिब्बे आपस में बिल्कुल जुड़े होंगे और इन्हें अलग नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा ये लो फ्लोर होंगे. ये डिब्बे भी मेट्रो की तरह ही स्टील और एल्युमिनियम के बने होंगे। इन ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 60 किमी./घं. तक हो सकती है।