नोटबंदी: अध्यादेश से खत्म होगी RBI की देनदारी

नई दिल्ली(7 दिसंबर): मोदी सरकार एक ऑर्डिनेंस के जरिए आरबीआई एक्ट में संशोधन कर सकती है। इसकी जरूरत नोटबंदी पर 8 नवंबर को हुई सरकारी घोषणा के जरिए रद्द किए गए 500 और 1000 रुपये के उन नोटों पर आरबीआई की देनदारी कानूनी रूप से खत्म करने के लिए पड़ेगी, जो 30 दिसंबर तक बैंकों में जमा नहीं किए जाएंगे।

- संसद का विंटर सेशन 23 दिसंबर को खत्म होगा। इस सेशन में सरकार अब तक कोई खास विधायी काम नहीं कर सकी है। बजट सेशन जनवरी के आखिरी दिनों में शुरू होगा। इस बीच सरकार के पास संशोधनों को संसद से पास कराने का कोई मौका हाथ नहीं आएगा।

- 31 दिसंबर तक ऐसे अनुमान सामने आ जाएंगे कि रद्द किए गए कितने नोट बैंकों में नहीं लौटाए गए। तब उन नोटों पर आरबीआई की देनदारी खत्म करने का लीगल बैक-अप सरकार अध्यादेश के जरिए दे सकती है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम अध्यादेश लाने पर विचार कर सकते हैं।'

- कानूनी रूप से तस्वीर साफ होने से आरबीआई उन नोटों को कैंसल कर सकेगा, जो बैंकों में नहीं लाए गए और सरकार फिर उतनी रकम का इस्तेमाल बजट में कर सकती है, जिसके 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। अभी जो अनुमान आ रहे हैं, उनके मुताबिक 500 और 1000 के नोटों वाली 15 लाख करोड़ रुपये की करंसी का एक ठीकठाक हिस्सा बैंकों में नहीं आएगा।

- वॉलंटरी इनकम डिक्लेयरेशन स्कीम को काला धन रखने वालों के लिए आखिरी मौका बताने वाली सरकार ने हालांकि नोटबंदी के ऐलान के बाद टैक्स चोरों को सेटलमेंट का एक और मौका दे दिया था, जिसमें अनएकाउंटेड इनकम पर मोटे तौर पर 50% टैक्स लगना है। ऐसे में रद्द नोटों का कुछ और हिस्सा बैंकों से बाहर रह सकता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, रद्द नोटों में करीब 10 लाख करोड़ रुपये बैंकों में जमा हो चुके हैं, लेकिन उम्मीद है कि 3-4 लाख करोड़ रुपये बाहर रह सकते हैं। रद्द किए गए नोट 30 दिसंबर तक बैंकों में जमा किए जा सकते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को कहा था कि 500 और 1000 रुपये के नोट अब लीगल टेंडर नहीं रह जाएंगे। हर नोट पर आरबीआई का यह वादा रहता है कि वह नोट रखने वाले को उस पर लिखी वैल्यू के बराबर रकम देगा। ऐसे में पीएम की घोषणा से यह भ्रम पैदा हुआ कि आरबीआई की यह देनदारी खत्म की जा सकती है या नहीं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले महीने कहा था कि कुछ कानूनी उपायों की जरूरत हो सकती है। हालांकि, आरबीआई की देनदारी खत्म करने के लिए नोटिफिकेशन जारी करने से बात शायद न बने और उसे कानूनी चुनौती भी दी जा सकती है।

आरबीआई के फॉर्मर गवर्नर डी सुब्बाराव ने भी हाल में कहा था कि बैंकों में जमा नहीं किए गए नोटों पर अपना दावा साबित करने के लिए सरकार को कानून बदलने की जरूरत पड़ सकती है।